Thursday, March 5, 2026 |
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भारतीय निर्यातकों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की होती निरंतर पहल

by Business Remedies
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केंद्र सरकार भारतीय निर्यातकों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए वह कई योजनाएं शुरू कर पहल कर रही है। निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए सरकार ने गत दिनों ही मार्केट एक्सेस सपोर्ट (एमएएस) योजना शुरू की है। यह योजना निर्यातकों को नए बाजारों में प्रवेश करने और अपनी उपस्थिति बढ़ाने में मदद करेगी। इसके तहत 4,531 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। वहींं एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन(ईपीएम) योजना लाई गई है। यह एक फ्लैगशिप पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में मजबूत बनाना है। इसके तहत 25,060 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम (आईईएस) योजना निर्यातकों को ब्याज दरों पर छूट प्रदान करती है, जिससे उन्हें अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलती है। एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (एएएस)योजना निर्यातकों को कच्चे माल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात पर ड्यूटी में छूट प्रदान करती है। वहीं ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम (डीबीके) योजना निर्यातकों को अपने उत्पादों पर लगने वाले टैक्स और ड्यूटी की वापसी प्रदान करती है। इन योजनाओं के माध्यम से भारतीय निर्यातक अपनी क्षमता बढ़ा सकते हैं और वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकते हैं। जहां वर्ष, 2025 के आर्थिक सुधार कुल मिलाकर परिणाम आधारित शासन की ओर स्पष्ट बदलाव को दर्शाते हैं, जो नागरिकों और व्यवसायों के लिए घर्षण को कम करते हैं। पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाते हैं तथा स्थायी, समावेशी विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करते हैं। कराधान को सरल बनाकर, श्रम कानूनों को आधुनिक बनाकर, एमएसएमई को मजबूत करके, ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देकर तथा डिजिटल भुगतानों को उन्नत करके, ये उपाय सामूहिक रूप से भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास, लचीलापन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देते हैं।



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