भारत पिछले काफी अरसे से पाम तेल के क्षेत्र में अपनी मांग को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। जहां एक ओर भारत मलेशिया में अंकुरित पाम तेल के बीजों का सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है तथा इसकी मांग में वृद्धि हो रही है, क्योंकि देश घरेलू पाम तेल उत्पादन को बढ़ावा देने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्रयास तेज कर रहा है। मुख्य रूप से यह आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेल पाम मिशन जैसी सरकारी योजनाओं पर जोर दे रही है। इस मिशन के तहत सरकार ने वर्ष, 2021 से 2026 तक के लिए पाम तेल की खेती के क्षेत्र को तीन गुना करने और कच्चे पाम तेल के उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत 2026 तक कुल खेती क्षेत्र को तीन गुना करके एक मिलियन हेक्टेयर करने और कच्चे पाम तेल के उत्पादन को 1.125 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। रोपण सामग्री के लिए सहायता राशि बारह हजार रुपए प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 29,000 रुपए प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। इस योजना का विशेष ध्यान उन राज्यों पर है, जहां पाम तेल की खेती के लिए अनुकूल मौसम की स्थिति है, उनमें उत्तर-पूर्वी राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह है। किसानों की ओर से अधिक पौधे लगाने से अगले 6 वर्षों में भारत में पाम तेल का उत्पादन तीन गुना होने का अनुमान जताया जा रहा है। ऐसे में भारत पाम तेल के उत्पादन बढ़ाने में आत्मनिर्भर बनकर जल्द उभरेगा।

