Thursday, March 5, 2026 |
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रेयर अर्थ मेटल उत्पादन में भारत को आगे बढऩे में कई तकनीक और बुनियादी चुनौतियां

by Business Remedies
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भारत को आज भी रेयर अर्थ मेटल पर दूसरे देशों के आयात पर निर्भर होना पड़ रहा है। वैसे तो भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ मेटल भंडार है, लेकिन उसका उत्पादन बहुत कम है। वैसे भारत सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे खनिज ब्लॉकों की नीलामी और एकीकृत विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की है, लेकिन इन क्षेत्रों में अभी भी तकनीक और बुनियादी चुनौतियां हैं। पिछले काफी दिनों से अमेरिका और चीन के बीच जारी आर्थिक खींचतान के बीच रेयर अर्थ मेटल्स एक बार फिर चर्चा में आया है। दुनिया की सबसे बड़ी रेयर अर्थ सप्लायर होने के कारण चीन इस सेक्टर में अपनी पकड़ को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि हाल ही में चीन ने अमेरिका को कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई फिर से शुरू की है, लेकिन वह अभी भी कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ धातुओं का एक्सपोर्ट रोक कर बैठा है। वहीं भारत अपनी मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें चीन मुख्य स्रोत है। भारत में सेरीयम, लैंथेनम, नियोडिमियम, प्रसीओडिमियम, डायसप्रोसियम, यूरोपियम और गैडोलिनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं। सरकार ने रेयर अर्थ के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खनिज ब्लॉकों की नीलामी और आत्मनिर्भर भारत पहल जैसे कदम उठाए हैं। भारत का लक्ष्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना और ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनना है। यदि भारत अपने संसाधनों का पूरी तरह से उपयोग करता है, तो यह इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा प्रणालियों और उन्नत तकनीकों के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन सकता है। केंद्र सरकार ने रेयर अर्थ ऑक्साइड को मेटल में, मेटल को अलॉय में और अलॉय को मैग्नेट में परिवर्तित करने वाली विनिर्माण इकाइयों को सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है। संभवतय: आने वाले समय भारत भी रेयर अर्थ पर दूसरे देशों पर निर्भर ना होकर स्वयं ही इसका उत्पादन कर निर्यात कर सकेगा।



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