नई दिल्ली,
स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की परिवर्तनकारी क्षमता तभी साकार हो सकती है, जब इसे भरोसा, नैतिकता और समावेशन की मजबूत नींव पर विकसित किया जाए। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बिना विश्वास और पारदर्शिता के AI का व्यापक उपयोग संभव नहीं है। बयान के अनुसार, जांच संबंधी कमी को दूर करना, एल्गोरिदम में मौजूद पक्षपात को समाप्त करना और सभी वर्गों तक समान स्वास्थ्य सुविधा पहुंच सुनिश्चित करना सुनियोजित नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करता है। इसके लिए विविध और उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य आंकड़ों की आवश्यकता है, साथ ही ऐसी स्वास्थ्य कार्यबल की भी जरूरत है जो AI के साथ मिलकर काम करने में सक्षम हो।
‘AI for All’ की परिकल्पना का उद्देश्य ऐसा तंत्र तैयार करना है, जो हर मरीज के लिए, हर क्षेत्र में, आय, भाषा या भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना समान रूप से काम करे। सरकार का मानना है कि AI को जनहित और दीर्घकालिक स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती को ध्यान में रखते हुए अपनाया जाना चाहिए। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘India AI Impact Summit’ के दौरान ‘Strategy for AI in Healthcare for India (SAHI)’ जारी की। यह रणनीति देश की स्वास्थ्य प्रणाली में AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा प्रस्तुत करती है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि AI स्वास्थ्य तंत्र को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसका उपयोग सार्वजनिक हित और विश्वास के अनुरूप होना चाहिए।
सम्मेलन के दौरान हुई विभिन्न चर्चाओं में स्वास्थ्य आंकड़ों में विविधता के महत्व, जवाबदेह और विश्वसनीय AI प्रणालियों की आवश्यकता तथा जनकल्याण के लिए AI के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि आंकड़े संतुलित और व्यापक नहीं होंगे तो AI आधारित निर्णयों में असमानता आ सकती है। इसी अवसर पर ‘BODH (Benchmarking Open Data Platform for Health AI)’ नामक मंच भी प्रारंभ किया गया। यह मंच स्वास्थ्य क्षेत्र में विकसित AI समाधान को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले उनकी जांच और प्रमाणन की व्यवस्थित व्यवस्था प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले AI उपकरण सुरक्षित, विश्वसनीय और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रमाणित हों।
यह मंच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की यात्रा में विश्वास, सुरक्षा और जवाबदेही को केंद्र में रखना अनिवार्य होगा। ‘SAHI’ की रूपरेखा, स्वास्थ्य आंकड़ों में विविधता की आवश्यकता और ‘BODH’ जैसे सहायक मंचों की उपयोगिता पर हुई चर्चाओं ने स्पष्ट किया कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो AI स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक परिवर्तन ला सकता है।




