हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भारत में कानूनी सेवा दिवस आज मनाया जाएगा। यह दिवस कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम,1987 की स्मृति में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कमजोर और वंचित वर्गों के लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है, जिसमें महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य शामिल हैं। यह दिवस लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता और लोक अदालतों जैसी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। इसके अलावा इसका उद्देश्य कानून और समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के बीच की खाई को पाटना है, ताकि सभी को निष्पक्ष और समान न्याय मिल सके।यह अधिनियम वर्ष,1995 को लागू हुआ था और तब से हर साल इस दिन को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह विधिक सेवा से संबंधित मानकों के निर्माण और प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन तथा अधिकतम उपयुक्त और किफायती विधिक सेवा कार्यक्रम स्थापित करने के लिए सर्वोच्च निकाय है। भारत में न्याय व्यवस्था के ढांचे में मुख्य संरक्षक का पद मुख्य न्यायाधीश का होता है। इसके अलावा यह गैर-सरकारी संगठनों और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को विधिक सहायता कार्यक्रमों और परियोजनाओं के क्रियान्वयन और संचालन में सहायता के लिए धन और अनुदान प्रदान करता है।

