विमानों में आए दिन आ रही तकनीकी खामियों के कारण यात्रियों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। यात्री इस भय के कारण विमानों से यात्रा करने में कतरा रहे हैं। पिछले दो महीनों से तो विमानों में खामियां लगातार देखने को मिल रही है। विमान यात्रा को वैसे तो बसों तथा ट्रेनों की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है, लेकिन पिछले दो माह से विमानों में उड़ान के दौरान खामियां आने से विमान यात्राओं में सुरक्षा पर प्रश्न उठने लगे हैं। अगर ऐसा चलता रहा तो पर्यटन भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। गत दिनों ही दिल्ली से लंदन जा रही ब्रिटेन की वर्जिन अटलांटिक एयरलाइन की एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में हादसा होते-होते टल गया। उड़ान के दौरान इंजन में फ्यूल लीक होने के कारण पायलट को इस्तांबुल एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। इस दौरान यात्री काफी दहशत में रहे। इस पूरी प्रक्रिया में यात्रियों को करीब बारह घंटे की परेशानी झेलनी पड़ी। विमान में दो सौ यात्री सवार थे। वहीं दूसरी घटना जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गत दिवस हुई, जहां करीब आधा दर्जन से अधिक फ्लाइट्स निर्धारित समय से देरी से पहुंची और रवाना हुईं। वहीं इसी माह गोवा से पूणे जा रहे स्पाइस जैट के विमान की खिडक़ी का फ्रेम ढीला होने के कारण वह बीच आकाश में उखड़ गया। शंघाई (चीन) से टोक्यो (जापान) जा रहा जापान एयरलाइन्स का बोइंग-737 विमान एक भयानक टर्बुलैंस में फंस कर अचानक नीचे आ जाने से यात्रियों में घबराहट फैल गई। जून महीने में ही केदारनाथ से गुप्त काशी जा रहा एक हैलीकाप्टर गौरीकुंड के निकट दुर्घटना ग्रस्त हो गया था। हांगकांग से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में किसी तकनीकी खराबी का पता चलने पर उड़ान के कुछ ही समय बाद उसे वापस हांगकांग हवाई अड्डे पर उतारना पड़ा। जरूरत इस बात की है कि विमानन कंपनियां उड़ान से पूर्व विमानों की तकनीकी जांच कर इसे उड़ान के लिए अनुमति प्रदान करें। नहीं तो ऐसी दुर्घटनाएं आने वाले समय में विकराल रूप ले लेंगी।

