इजरायल और ईरान के बीच युद्ध लगातार जारी है। गत दिनों अमेरिका भी युद्ध में शामिल हो गया है। अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर हमले किए। वहीं अमेरिका ने फोर्दो यूरेनियम संवर्धन केंद्र, नतांग और इरफहान परमाणु केंद्र को नष्ट करने का दावा किया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, इससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष छिडऩे की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने जून में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। ऐसे में भारत अब विकल्प रास्तों और देशों से कच्चे तेल की खरीद में जुट गया है। इस युद्ध में भारत जहां तटस्थ की भूमिका अदा कर रहा है। वह ना तो इजरायल के साथ चल रहा है और ना ही ईरान के पक्ष में है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिनों ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशाकियान से बातचीत भी की है। उन्होंने बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संवाद एवं कूटनीति से समाधान खोजे जाने पर जोर दिया है। केपलर के आंकड़ों से जानकारी मिली है कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने जून में रूस से प्रतिदिन २० से २२ लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रही है। चिंता इस बात की जताई जा रही है कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। अमेरिकी हमले के बाद ईरानी संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की मंजूरी दे दी है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया का २० फीसदी ईंधन जाता है। ईरानी सांसद और रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर इस्माइल कोसारी ने भी कहा है कि जब जरूरत महसूस होगी हम रास्ते बंद कर देंगे। अगर ईरान ऐसा करता है तो निश्चित रूप से आने वाले समय में दुनिया के सभी देशों में कच्चे तेल के लिए हा-हाकार मच सकता है।

