दुनिया भर में काफी संख्या में लड़कियां और लडक़े ऐसे काम में लगे हुए हैं जो उन्हें पर्याप्त शिक्षा, स्वास्थ्य, अवकाश और बुनियादी स्वतंत्रता प्राप्त करने से वंचित है। इस तरह उनके अधिकारों का उल्लंघन होता है। इन बच्चों में से आधे से ज्यादा बच्चे बाल श्रम के सबसे बुरे रूपों के संपर्क में हैं। बाल श्रम के इन सबसे बुरे रूपों में खतरनाक वातावरण में काम करना, गुलामी या जबरन श्रम के अन्य रूप, नशीली दवाओं की तस्करी और वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियां, साथ ही सशस्त्र संघर्ष में शामिल होना शामिल है। इन सभी बुराईयों को दूर करने के लिए आज दुनिया भर में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाएगा। इस मुहिम में हम सभी को कदम बढ़ाकर इसे जड़ से उखाडऩा होगा। इसका उद्देश्य भी बाल श्रम के खिलाफ विश्वव्यापी आंदोलन को बढ़ावा देना है। इसके अलावा बाल श्रम की समस्या पर ध्यान देना और इसे मिटाने के तरीके खोजना है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ओर से वर्ष, 2002 में पहली बार विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की स्थापना की गई थी। दुनिया भर में 160 मिलियन बच्चे यानि कि करीब 10 में से 1 बच्चा किसी ना किसी रूप में बाल श्रम में लगे हुए हैं। बाल श्रम को ऐसे काम के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो बच्चों को उनके बचपन, उनकी क्षमता और उनकी गरिमा से वंचित करता है और जो शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हानिकारक है। आज भी गरीबी में रहने वाले बच्चे इससे काफी प्रभावित हो रहे हैं। आज भी खदानों और खेतों में खतरनाक काम करने वाले बच्चे चोटग्रस्त हो जाते हैं। व्यावसायिक गलत क्रियाकलाप करने के लिए मजबूर किए गए बच्चे एचआईवी जैसी जानलेवा बीमारियों की जकड़ में आ जाते हैं। किसी भी काम में लगाए गए बच्चे अपनी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में ये परिणाम गरीबी से और भी बदतर हो जाते हैं। गरीब बच्चों को चिकित्सा देखभाल जैसी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच नहीं होती।

