पिछले दिनों मौसम विभाग की ओर से जारी भविष्यवाणी उत्साहवर्धक और राहतभरी कही जा सकती है। इस बार भारत में मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इस बार एल नीनो की स्थिति बनने की आशंका नहीं है। जून से सितंबर तक इस बार जमकर बारिश का आसार जताए जा रहे है। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलने के आसार हैं। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी दक्षिण-पश्चिमी मानसून से आता है और देश की लगभग आधी कृषि भूमि इस पर निर्भर है। समय पर और अच्छे मानसून से खाद्य आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है, मुद्रास्फीति कम हो सकती है और सिंचाई के लिए डीजल और बिजली का उपयोग कम हो सकता है। इससे ग्रामीण खर्च और समग्र आर्थिक भावना को बढ़ावा मिल सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार बारिश का आंकड़ा 87 सेंटीमीटर के दीर्घकालिक औसत का 105 फीसदी रहेगा। अल नीनो की स्थिति, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम मानसून बारिश से जुड़ी है, इस बार विकसित होने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग की ओर से ये भविष्यवाणी ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्से भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। मानसून में बारिश का असर सीधे खेती पर पड़ता है। अच्छा मानसून रहना भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी है। लगभग 42.3 फीसदी आबादी की आजीविका इसी पर निर्भर है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 18.2 फीसदी का योगदान करता है। देश के 52 फीसदी कृषि क्षेत्र में बारिश से ही सिंचाई होती है। यह देशभर में पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए जलाशयों को भरने के लिए भी महत्वपूर्ण है। जहां सामान्य बारिश का मतलब है कि चार महीने के मानसून सीजन में 87 सेंटीमीटर की औसत बारिश का 96 फीसदी से 104 फीसदी तक बारिश होना। यह औसत पिछले 50 सालों के आंकड़ों पर आधारित है। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून अच्छा रहने के आसार है। किसानों को फायदा होगा और पानी की समस्या भी कम होगी। हालांकि हमें जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना होगा। बारिश कभी भी एक जैसी नहीं होती,अत: हमें पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा। तभी हम पानी की एक-एक बंूद का बचा सकेंगे।

