भारत में जैविक खेती की वर्तमान स्थिति सकारात्मक और तेजी से बढ़ रही है। भारत जैविक खेती करने वाले 187 देशों में एक अद्वितीय स्थान रखता है। वित्त वर्ष, 2024-25 में जैविक उत्पादन 35 प्रतिशत बढ़ा है। अब जैविक उत्पादन का निर्यात लगभग 5,710 करोड़ रुपए हो गया है। जहां पिछले वर्ष 2023-24 में यह 494.80 मिलियन डॉलर तक रहा था। जैविक उत्पादन का निर्यात में बढ़ोतरी का मुख्य कारण चाय, मसाला, तिलहन, अनाज के निर्यात में वृद्धि है। सभी खाद्य पदार्थों में वृद्धि लगभग 41 प्रतिशत बढ़ी है। जैविक उत्पाद मानकों में स्पष्टता और पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने के उद्देश्य से नए नियमों के साथ राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि भारत में अगले तीन वर्षों में जैविक उत्पादों के निर्यात को 20,000 करोड़ रुपए तक बढ़ाने की क्षमता है क्योंकि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती में प्रवेश कर रहे हैं। इस लक्ष्य को साधने के लिए एफपीओ और कृषि और वाणिज्य मंत्रालय कौशल विकास के साथ संयुक्त काम करने की जरूरत है। जैविक उत्पादों की वैश्विक मांग करीब 1 लाख करोड़ रुपए है और प्रचार-प्रसार तथा उत्पादन बढऩे से यह मांग 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। भारत में वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक जैविक किसान हैं और जैविक खेती के तहत क्षेत्रफल के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। कुछ अतिरिक्त प्रयासों से हम जैविक खेती में वैश्विक लीडर बन सकते हैं, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारतीय जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा मिलेगा। सरकार भी ऑर्गेनिक इंडिया ब्रांड को पुन: स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सरकार की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि जैविक उत्पादों के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं वैश्विक स्तर पर मांग भी बढ़ रही है। ये मानक ऐसे समय में जारी किए गए हैं जब भारत के जैविक उत्पादों को कई आयात स्थलों पर आगे के परीक्षणों से गुजरना पड़ रहा है, जबकि अमेरिका ने अभी तक एनपीओपी के लिए अपनी मान्यता पुन: शुरू नहीं की है।

