Monday, July 13, 2026 |
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युवा सर्वश्रेष्ठ बनने का करते रहें प्रयास और काम में रखें मानवीय जुड़ाव: Dr. H.L. Gupta

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/जयपुर।चारु भाटिया |  राजस्थान के एक छोटे से गांव से लेकर जयपुर के सबसे सम्मानित डेंटल क्लीनिकों में से एक का संचालन करने तक की यात्रा है डॉ. एच.एल. गुप्ता की। जो मेहनत, नैतिकता और रोगियों की सेवा के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। गुप्ता डेंटल क्लिनिक के संस्थापक डॉ. गुप्ता, जो आज शहर में दो शाखाओं में कार्यरत हैं और करीब तीन दशकों से आधुनिक दंत चिकित्सा को मानवीय सेवा के साथ जोड़ते आ रहे हैं। गत दिनों बिजनेस रेमेडीज की टीम ने उनसे उनके बचपन, क्लिनिक की स्थापना और रोगी-सेवा को लेकर बातचीत की।

बचपन से लेकर जयपुर में क्लिनिक शुरू करने तक की यात्रा के बारे में बताएं?
मेरा जन्म राजस्थान के दौसा जिले के गीजगढ़ गांव में हुआ। पिता जी गांव में डॉक्टर थे और मैंने बचपन से ही उन्हें नि:स्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करते देखा। उसी से मुझे डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। वर्ष, 1985 में मैंने पहली ही कोशिश में प्री-मेडिकल परीक्षा पास की और जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। बाद में मैंने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से मास्टर्स इन डेंटल सर्जरी की पढ़ाई पूरी की। कुछ वर्षों तक विभिन्न दंत चिकित्सकों के साथ काम करके मैंने अनुभव प्राप्त किया और रोगियों की जरूरतें समझीं। वर्ष, 1996 में मैंने और संगीता गुप्ता ने मिलकर जयपुर में गुप्ता डेंटल क्लिनिक की शुरुआत की। आज हमारी दो शाखाएं किसान मार्ग और महावीर नगर में हैं।

दंत चिकित्सा में सफलता के सबसे अहम कारक क्या हैं?
मेहनत, धैर्य और दृढ़ निश्चय सबसे जरूरी हैं। दंत चिकित्सा लगातार विकसित हो रही है, इसलिए लगातार सीखते रहना बहुत अहम है। एक अच्छे मार्गदर्शक का होना भी आवश्यक है। मैं हर मरीज को एक सीखने का अवसर मानता हूं। मरीज हमारे सबसे बड़े शिक्षक हैं। मेरे लिए मरीज भगवान के समान हैं। यही सोच विनम्र और समर्पित बनाए रखती है।

चिकित्सा अब व्यवसाय बन गया है, इस पर आपका क्या कहना है?
मेरे लिए पैसा कभी प्राथमिकता नहीं रहा। पैसा सेवा का परिणाम है। यदि आप पूरी ईमानदारी से सेवा करते हैं, तो पैसा अपने आप आ जाता है। मेरी प्राथमिकता हमेशा मरीज की देखभाल रही है।

आपके क्लिनिक में उपयोग होने वाले सभी उपकरण क्या भारत के ही हैं?
पूरी तरह नहीं। कुछ उपकरण हमने विदेश से आयात किए हैं ताकि रोगियों को सर्वोत्तम उपचार मिल सके। वहीं कई उपकरण भारत के भी हैं। मेरा लक्ष्य सिर्फ यही है कि मरीज को सटीक और प्रभावी इलाज मिले।

युवाओं को सफल दंत चिकित्सक बनने के लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगेे?
युवा जो भी करें, उसमें सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करते रहें। सीखना कभी बंद न करें। दंत चिकित्सा सिर्फ दांतों का इलाज नहीं है, बल्कि यह इंसानों का इलाज है। अपने काम में मानवीय जुड़ाव बनाए रखें।

वर्तमान में क्या चिकित्सा में नैतिकता (एथिक्स) को बनाए रखा जा रहा है?
नैतिकता चिकित्सा की नींव है। डॉक्टर को मरीज को उसकी स्थिति, उपचार के विकल्प और संभावित जोखिम साफ-साफ बताने चाहिए। बड़े इलाज से पहले सूचित सहमति लेना जरूरी है। दुर्भाग्य से आज कुछ चिकित्सकों में नैतिकता की कमी देखी जा रही है। हमें याद रखना चाहिए कि डॉक्टर का पहला कर्तव्य मरीज के प्रति है, ना कि मुनाफे के लिए।

जयपुर में आपके सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी कौन हैं?
मैं दूसरों को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी मानता हूं। मेरा ध्यान सिर्फ बेहतर सेवा देने पर है। जब आप ईमानदारी से सेवा करते हैं, तो मरीज खुद-ब-खुद आपके पास आते हैं।

आपका क्लिनिक अन्य क्लिनिकों से अलग कैसे है?
हमारी सबसे बड़ी ताकत पारदर्शिता और नैतिकता है। हम सही निदान करते हैं, साफ-साफ समझाते हैं और मरीज की सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। हमारी पहचान मुंहजबानी प्रचार (Mouth publicity) से बनी है, जो मरीज की संतुष्टि का सबसे बड़ा प्रमाण है।

क्लिनिक चलाने के अलावा आप दंत चिकित्सा के प्रोफेसर भी हैं, दोनों को कैसे संभाल पाते हैं?
मेरे लिए दंत चिकित्सा सिर्फ पेशा ही नहीं, बल्कि शौक और जुनून है। मैं राजस्थान डेंटल कॉलेज में प्रोफेसर भी हूं। दोपहर 3 बजे तक मेरी कक्षाएं होती हैं और उसके बाद मैं क्लिनिक जाता हूं। ऐसी कोई दिक्कत नहीं आती है। पढ़ाने से मैं हमेशा नवीनतम शोध और तकनीक से जुड़ा रहता हूं।

आपका अब तक की यात्रा का सबसे संतोषजनक पहलू क्या रहा है?
मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि मरीजों का विश्वास है। जब कोई दर्द लेकर आता है और मुस्कान लेकर जाता है, तो वह अनमोल खुशी होती है। यही विश्वास मुझे हर दिन प्रेरित करता है।

क्लिनिक के लिए आपका दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है?
मेरी इच्छा है कि हमारा क्लिनिक हमेशा ऐसा स्थान बने, जहां मरीज सम्मानित और सुरक्षित महसूस करें। तकनीक बदलती रहेगी, लेकिन हमारे मूल्य, नैतिकता, मरीज-प्रथम सेवा और निरंतर सीखने की परंपरा हमेशा कायम रहेगी।



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