Tuesday, August 11, 2026 |
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DBT से AI Leakage में कमी, पिछले 10 वर्षों में भारत ने 3.48 लाख करोड़ रुपये बचाए: रिपोर्ट

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली(आईएएनएस)। भारत के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) सिस्टम के तहत लीकेज में कमी आने के साथ कुल 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू किए गए इस सिस्टम के शुभारंभ के बाद से लाभार्थी कवरेज में 11 करोड़ से 176 करोड़ तक 16 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। लीकेज को रोकने के लिए इस सिस्टम के तहत पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है। परिणामस्वरूप सब्सिडी आवंटन कुल व्यय के 16 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत हो गया है।

स्टडी में कहा गया है, “डीबीटी ने लीकेज पर अंकुश लगाने और ट्रांसपेरेंसी को बढ़ावा देने के साथ फंड वितरण को लेकर सटीकता सुनिश्चित की है। इसी के साथ डीबीटी के साथ कल्याणकारी वितरण को दोबारा परिभाषित किया गया है।” यह पॉलिसी डॉक्युमेंट बजट, सब्सिडी और सामाजिक परिणामों पर डीबीटी के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक दशक (2009-2024) के आंकड़ों का मूल्यांकन करता है। पॉलिसी डॉक्युमेंट में कहा गया है कि वेलफेयर एफिसिएंसी इंडेक्स 2014 में 0.32 से बढक़र 2023 में 0.91 हो गया है। यह इंडेक्स राजकोषीय और सामाजिक लाभों को मापता है।

डॉक्युमेंट के अनुसार, 2009-10 में कल्याण बजट में 2.1 लाख करोड़ रुपये से 2023-24 में 8.5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि के बावजूद सब्सिडी आवंटन में गिरावट दर्ज की गई है, जो कि डीबीटी की सफलता को दर्शाता है। डॉक्युमेंट के अनुसार, फूड सब्सिडी कुल बचत का 53 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि एमजीएनआरईजीएस और पीएम-किसान जैसे कार्यक्रमों के तहत समय पर मजदूरी हस्तांतरण कर 22,106 करोड़ रुपये की बचत हासिल की गई। आधार-लिंक्ड ऑथेंटिकेशन ने फेक लाभार्थियों को कम करने में मदद की, जिससे राजकोषीय व्यय के बिना कवरेज का विस्तार हो पाया। स्टडी में मिक्स्ड-मेथड अप्रोच का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें केंद्रीय बजट डेटा, डीबीटी पोर्टल रिकॉर्ड और सेकेंडरी सोर्स को जांचा गया था। इसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और ग्रामीण और अर्ध-शहरी बैंकिंग पहुंच को प्राथमिकता देने की भी सिफारिश की गई है। स्टडी में कहा गया है कि लीकेज को कम करने के लिए एआई-ड्रिवन फ्रॉड डिटेक्शन को इंटीग्रेट किया जाना चाहिए।



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