नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | भारत की कोयला आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 को जारी कर दिया है। इससे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत ऊर्जा बाजारों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। यह जानकारी कोयला मंत्रालय की ओर से मंगलवार को दी गई। मंत्रालय ने बयान में कहा कि सरकार देश में कोयला एक्सचेंजों की स्थापना के लिए मार्ग तैयार कर रही है। हाल ही में पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 ने खनिज एक्सचेंज की अवधारणा को लागू किया है और केंद्र सरकार को कोयले और उसके प्रसंस्कृत रूपों सहित खनिजों के पारदर्शी और कुशल व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार दिया है।
पंजीकरण 25 वर्षों की अवधि के लिए होंगे वैध
इसके तहत कोयला मंत्रालय ने दिसंबर, 2025 में कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) को कोयला एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण के रूप में नामित किया है। पात्र संस्थाओं को सीसीओ की ओर से कोयला एक्सचेंज स्थापित करने तथा संचालित करने, बाजार नियम तथा उपनियम बनाने और कोयला व्यापार को सुगम बनाने के लिए अधिकृत किया जाएगा। पंजीकरण 25 वर्षों की अवधि के लिए वैध होंगे।
कोयला विपणन में आएगा क्रांतिकारी बदलाव
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, कोल एक्सचेंज की शुरुआत से कोयला विपणन में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा, क्योंकि यह पारंपरिक एक से अनेक बिक्रर मॉडल से हटकर एक प्रतिस्पर्धी अनेक से अनेक व्यापार मंच की ओर अग्रसर है। इससे पारदर्शी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण संभव होगा, दक्षता में सुधार होगा और वाणिज्यिक तथा कैप्टिव खनिकों सहित कोयला उत्पादकों को खरीदारों के व्यापक समूह तक आसान पहुंच प्राप्त होगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियां भी बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए इस मंच का लाभ उठा सकती हैं।
विकसित भारत की परिकल्पना हो सकेगी साकार
मंत्रालय ने कहा कि कोयला विनिमय पहल व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और एक आधुनिक, आत्मनिर्भर ऊर्जा परितंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अधिक प्रतिस्पर्धी और कुशल कोयला बाजार बनाकर, इस सुधार से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने, औद्योगिक विकास को समर्थन मिलने और सतत आर्थिक विकास तथा भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा क्षेत्र के माध्यम से विकसित भारत की परिकल्पना में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
कोयला एक्सचेंज नियम-2026 क्या है?
केंद्र सरकार की ओर से 2026 में अधिसूचित नए नियम हैं, जिनका उद्देश्य देश में कोयले की खरीद-बिक्री को एक डिजिटल, पारदर्शी और बाजार-आधारित प्रणाली में बदलना है। अब कोयले का व्यापार पहले की तरह सिर्फ प्रशासनिक आवंटन या सीमित नीलामी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक स्टॉक-एक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म पर होगा, जहां खरीदार-विक्रेता सीधे ट्रेड कर सकेंगे।
इन नियमों के तहत भारत में कोयला ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कोयले की पारदर्शी कीमत निर्धारण करना, सप्लाई चेन को आधुनिक बनाना है। इस पूरे सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन बनाया गया है। खरीदार और विक्रेता एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करेंगे।

