भारत की अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने एक व्यापक और मूक क्रांति की शुरुआत कर दी है, जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ने वाला है। अनुमान है कि वर्ष, 2030 तक एआई भारतीय अर्थव्यवस्था में 500 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दे सकती है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि 2035 तक एआई भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग डॉलर 1.7 ट्रिलियन से लेकर डॉलर 1.9 ट्रिलियन तक की वृद्धि कर सकता है, जो सालाना आर्थिक विकास दर में महत्वपूर्ण इजाफा करेगा।
UPI और Digital Public Infrastructure के साथ जुड़कर एआई ने वित्तीय समावेशन को गति दी है। बैंक और वित्तीय संस्थान धोखाधड़ी का पता लगाने, लोन देने की प्रक्रिया को आसान बनाने और ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने के लिए इसका व्यापक उपयोग कर रहे हैं। वहीं एआई संचालित ड्रोन, सेंसर और सटीक खेती के माध्यम से किसानों को मौसम और फसल की बीमारियों की पूर्व जानकारी मिल रही है, जिससे लागत कम और पैदावार बढ़ रही है।
दूरदराज के इलाकों में Telemedicine और एआई से बीमारियों की जल्द पहचान से इलाज सस्ता और सुलभ हो रहा है। एआई के आने से कुछ क्षेत्रों में रूटीन काम कम हुए हैं, लेकिन Data Science, Machine Learning और तकनीकी क्षेत्र में लाखों नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
यदि भारत एआई समाधान विकसित करने में सफल रहा, तो वह केवल सस्ता श्रम प्रदान करने के बजाय उच्च मूल्य तकनीकी सेवाओं का केंद्र बन सकता है। जहां वर्ष, 2030 तक देश को साक्षर एआई पेशेवरों की भारी आवश्यकता होगी। इसलिए कार्यबल को Upskill और Reskill करना अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
हालांकि अभी भी कई भारतीय कंपनियां पूरी तरह से एआई को अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने के शुरुआती दौर में हैं। इस तकनीकी बदलाव को संतुलित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से IndiaAI Mission चलाया जा रहा है, जिसमें साढ़े दस करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के साथ कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले समय में एआई की मदद से अर्थव्यवस्था को गति मिल सकेगी।

