Thursday, July 16, 2026 |
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हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर हर संभव प्रयास करें: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देना हम सभी की जिम्मेदारी है, क्योंकि यह हमारे मन की अभिव्यक्तिका स्वरूप है। हिंदी न केवल हमारी राजभाषा है बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रीय एकता की प्रतीक भी है। हम सभी का कर्तव्य है कि हम हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हर संभव प्रयास करें, क्योंकि यह केवल एक संवैधानिक निर्देश ही नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता भी है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित मध्य पश्चिम एवं उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी के सम्मान, प्रयोग और प्रसार में अपनी पूरी शक्ति और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए हमें हर स्तर पर, हर क्षेत्र में इसे प्रोत्साहित करना चाहिए। यही हमारी असल पहचान है। उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की सामाजिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सकती है।
मुख्यमंत्री ने डिजिटल युग में हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के तकनीकी युग में हिंदी को डिजिटल प्लेटफार्मों पर भी समाहित करना आवश्यक है। इस सम्मेलन में कंप्यूटर पर हिंदी में कार्य करने के नवीनतम तरीकों और सुविधाओं के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है, जो सराहनीय कार्य है।
शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किए हैं। इनके नेतृत्व ने न केवल हमारी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है बल्कि देश में आंतरिक सुरक्षा को लेकर अगाध विश्वास पैदा किया है।
राजभाषा हिंदी देश की एकता की सूत्रधार: इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने अपने संबोधन में कहा कि हमें देश की सभी भाषाओं का मान-सम्मान रखते हुए हिन्दी को राष्ट्रीय बोलचाल की भाषा बनाने के लिए प्रयास करना होगा। राजभाषा हिंदी का प्रयोग हमारी एकता का सूत्रधार है। उन्होंने कहा कि भाषा मानव समाज और देश की अंत: शक्ति है। यदि हम भाषा को उसके सीमित रूप में देखें तो यह केवल संप्रेषण का माध्यम मात्र है, लेकिन यदि राष्ट्र के संदर्भ में देखा जाए तो भाषा और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की आत्मा होती है, जिसमें देशवासी संवाद करते हैं।
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि हिंदी भारत में ही नहीं नेपाल, सूरीनाम, फिजी, मारीशस, और गुयाना के साथ ही दूसरे बहुत से देशों में समान रूप से लोकप्रिय है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान हिंदी ने पूरे देश में राष्ट्र प्रेम और स्वाभिमान की भावना जागृत करने में अमूल्य योगदान दिया था।
सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं और राजभाषा हिंदी एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, जिससे जनहित की योजनाओं का लाभ आमजन तक सही मायने में पहुंचे।



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