Friday, July 10, 2026 |
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चीन ने तीन भारतीय चावल निर्यातक कंपनियों के आयात लाइसेंस रद्द किए

जीएमओ विवाद ने बढ़ाई टेंशन, निर्यात पर सीमित असर

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज | चीन ने भारत की तीन प्रमुख चावल निर्यात कंपनियों के आयात लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। यह फैसला जीएमओ (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म) के कथित निशान मिलने के विवाद के बाद लिया गया है। चीन का यह आदेश 17 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है। लगभग एक महीने पहले (मार्च 2026 के अंत में) चीन ने इन कंपनियों के कुछ शिपमेंट वापस कर दिए थे। इस घटना से पहले ही मिडिल ईस्ट संकट से जूझ रहा भारतीय चावल उद्योग एक और झटका लगा है।

प्रभावित कंपनियां

चीन के कस्टम्स विभाग ने जिन तीन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए हैं, वे हैं:
NM FoodImpex Pvt. Ltd. (हरियाणा)
Shriram Food Industry Ltd. (नागपुर)
Sponge Enterprises Pvt. Ltd. (रायपुर, छत्तीसगढ़)
ये कंपनियां मुख्य रूप से नॉन-बासमती ब्रोकन राइस (टूटे चावल) का निर्यात करती हैं, जो चीन में पशु चारे और औद्योगिक उपयोग के लिए मांग में रहता है।

क्या है पूरा मामला?
लगभग एक महीने पहले चीन ने इन तीनों कंपनियों के शिपमेंट खारिज कर दिए थे। चीनी अधिकारियों का दावा था कि इनमें जीएमओ के अंश पाए गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में जीएमओ चावल की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित है और कोई जीएमओ किस्म व्यावसायिक रूप से नहीं उगाई जाती। इसके बावजूद, शिपमेंट को चीन के China Certification and Inspection Group (CCIC) ने भारत में ही जांचकर नॉन-जीएमओ सर्टिफिकेट जारी किया था। फिर भी चीनी कस्टम्स ने इन्हें रिजेक्ट कर दिया।

चीन स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) को भेजी। एपीईडीए ने प्रभावित कंपनियों को सूचित किया। कंपनियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा एपीईडीए से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार रिसिप्रोकल एक्शन (प्रतिकारात्मक कदम) पर भी विचार कर रही है क्योंकि चीन का आधार कानूनी रूप से कमजोर माना जा रहा है।

निर्यात पर कितना असर?
यह कार्रवाई सिर्फइन तीन कंपनियों तक सीमित है। भारत का कुल चावल निर्यात 2025 में लगभग 21.55 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) रहा था, जो 2024 के 18.05 एमएमटी से 19 प्रतिशत ज्यादा है। 2025-26 में लक्ष्य 24-30 एमएमटी तक पहुंचने का है। भारत का चीन को चावल निर्यात अपेक्षाकृत छोटा है। 2024 में यह 57.6 मिलियन डॉलर (लगभग 1,18,600 मीट्रिक टन) का था। चीन की कुल चावल जरूरत (लगभग 16 एमएमटी प्रति वर्ष) में भारत की हिस्सेदारी पहले 3 एमएमटी तक बताई जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में यह काफी कम हो गई है। इन तीन कंपनियों के लाइसेंस रद्द होने से कुल भारतीय चावल निर्यात पर बहुत सीमित या नगण्य असर पड़ेगा। हालांकि, इससे अन्य देशों के खरीदारों में भी संदेह पैदा हो सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट का अतिरिक्त झटका
चावल उद्योग पहले ही पश्चिम एशिया (ईरान संकट) से प्रभावित है। मार्च 2026 में लगभग 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल भारतीय बंदरगाहों पर या ट्रांजिट में फंस गया। फ्रेट दरें दोगुनी हो गईं, कंटेनर की कमी हो गई और मिडिल ईस्ट (सऊदी, ईरान, यूएई) के बाजार प्रभावित हुए। बासमती निर्यात का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा मिडिल ईस्ट जाता है। इसलिए जीएमओ विवाद को दोहरा झटका माना जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना व्यापार युद्ध का हिस्सा भी हो सकती है। भारत सरकार अगर मजबूती से जवाब देती है तो स्थिति सुधर सकती है। फिलहाल एपीईडीए और वाणिज्य मंत्रालय इस मामले पर नजर रखे हुए हैं। यह विवाद भारतीय चावल निर्यातकों के लिए चेतावनी भी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता प्रमाणन और राजनीतिक संबंधों का कितना महत्व है। कुल मिलाकर, भारत का चावल निर्यात अभी भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन छोटे-छोटे विवाद बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।



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