बिजऩेस रेमेडीज/वडोदरा। Central University of Gujarat (CUG) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज और महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा (एमएसयू) के अटल बिहारी वाजपेयी नीति अनुसंधान एवं अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान (AIEPRIS) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को एमएसयू की कुलाधिपति राजमाता शुभांगिनीराजे गायकवाड़ ने बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया।
गुरुवार को कुंढेला स्थित स्थायी परिसर में ‘भारत के प्रमुख शैक्षिक विचारकों के विचार और एनईपी -2020 के माध्यम से परिवर्तनकारी शिक्षा’ विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में राजमाता ने कहा कि सीयूजी और MSU जैसे शिक्षण संस्थानों ने गुजरात राज्य की अस्मिता को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। उन्होंने महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के शिक्षा पर योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आजादी से पूर्व भी बड़ौदा राज्य की प्राथमिक साक्षरता दर सौ फीसदी थी। उन्होंने देश की संस्कृति एवं कला को बढ़ावा देने का कार्य किया था, जिसका प्रभाव वर्तमान समय में भी है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता गुंथा लक्ष्मण ने कहा कि हमारा इतिहास गौरवशाली रहा है। यहां अध्ययन के लिए विश्वभर से लोग आते थे। भारत की समृद्ध शिक्षण परंपरा में हमारे चिंतकों और शिक्षकों का बड़ा योगदान रहा है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के अधिष्ठाता प्रो. मनीष ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक चर्चाओं के साथ आगे भी इसी तरह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान AIEPRIS के निदेशक प्रो. अमित ढोलकिया ने सीयूजी के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान एवं एमएसयू केAIEPRIS के बीच एमओयू होने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटिश काल से पूर्व ही भारत को शिक्षण में महारथ हासिल थी। एनईपी-2020 के माध्यम से अब भारत फिर से विश्वगुरु बनेगा।
शिक्षा में भौतिकता के साथ आध्यात्मिकता का समावेश : उपाध्यक्षता करते हुए एमएसयू के प्रभारी कुलपति प्रो. धनेष पटेल ने आचार्य चाणक्य, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ ठाकुर, महर्षि अरविंद और पंडित मदन मोहन मालवीय के शिक्षा के क्षेत्र में किये योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था और एनईपी-2020 के बीच समानताओं के बारे में बताया। इस दौरान सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने कहा कि बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का मार्गदर्शन किया था। 1922 से 1929 तक महाराजा सयाजीराव बीएचयू के चांसलर भी रहे। पूर्व में मैकाले की शिक्षा पद्घत्ति से प्रभावित होकर देश में पाश्चात्य संस्कृति की तर्ज पर शिक्षा दी जाती थी। पहली बार महामना ने बीएचयू की स्थापना कर भारतीय मूल्यों के आधार पर शिक्षा देने की शुरूआत की। इस दौरान एमएस यूनिवर्सिटी के पीजी स्टूडेंट्स द्वारा एनईपी-2020 पर लिखी पुस्तक का लोकार्पण किया गया।

