नियमित रक्तदान को प्रोत्साहित करने, रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने और नि:स्वार्थ स्वैच्छिक रक्तदाताओं के जीवनरक्षक योगदान का सम्मान करने के लिए आज विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाएगा। एक रक्तदाता का दान कई मरीजों के जीवन को बचाने में सहायक हो सकता है। इस वर्ष की थीम मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें। जीवन बचाएं, हर रक्तदान के केंद्र में मानवता को रखता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लड डोनर ऑर्गेनाइजेशन्स और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन ने मिलकर इस दिवस की शुरुआत की। पहला आधिकारिक रूप से विश्वरक्तदाता दिवस वर्ष, 2004 में मनाया गया था। वहीं मई, 2005 में 58वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से इसे एक वार्षिक वैश्विक कार्यक्रम के रूप में घोषित किया गया। यह तारीख ऑस्ट्रियाई-अमेरिकी वैज्ञानिक और चिकित्सक कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन के अवसर पर चुनी गई। उनका जन्म 14 जून,1868 को हुआ था। कार्ल लैंडस्टीनर ने ही 1901 में एबीओ ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी, जिसने चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी। इस महान खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य स्वैच्छिक और नि:शुल्क रक्तदाताओं का सम्मान करना, सुरक्षित रक्त की आवश्यकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और दुर्घटनाओं, शल्य चिकित्सा, प्रसव, कैंसर उपचार तथा गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए पर्याप्त रक्त उपलब्ध कराने का संदेश देना भी है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। प्रत्येक दान मात्र एक चिकित्सीय कार्य नहीं है, यह एकजुटता, करुणा और सामूहिक जिम्मेदारी की एक सशक्त अभिव्यक्ति है। इस विचार से प्रेरित होकर कि संपूर्ण मानवता एक बूंद में समाहित हो सकती है, यह अभियान इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे प्रत्येक दाता एक ऐसी जीवनरेखा बनाने में योगदान देता है जो हम सभी को जोड़ती और सुरक्षित रखती है।

