Wednesday, July 1, 2026 |
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दूसरी छमाही में बैंक ऋण में तेज़ी की उम्मीद

रिटेल क्रेडिट बनेगा मुख्य चालक, एमएसएमई और इंफ्रा सेक्टर को भी बढ़ावा

by Business Remedies
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भारत की बैंकिंग प्रणाली के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही काफी उत्साहजनक साबित हो सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर से मार्च की अवधि में बैंक ऋण वृद्धि 11-12 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह दर पिछले वित्त वर्ष और पिछले दशक के औसत वृद्धि दोनों से अधिक मानी जा रही है।

रिटेल लोन रहेगा केंद्र में

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उछाल की सबसे बड़ी वजह रिटेल क्रेडिट होगा। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में रिटेल लोन की वृद्धि दर 13 प्रतिशत तक जा सकती है, जो पिछले साल के 11.7 प्रतिशत से बेहतर है।

  • होम लोन को कम ब्याज दरों का फायदा मिलेगा।

  • गोल्ड लोन की हिस्सेदारी भले घट रही है, लेकिन इसमें निरंतर वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

  • अनसिक्योर्ड लोन यानी बिना गारंटी वाले ऋणों में उपभोक्ता मांग और कम आधार के चलते तेज़ी देखी जा सकती है।

क्रिसिल के मुख्य रेटिंग अधिकारी कृष्णन सीतारमन के अनुसार, “जीएसटी सुधार, आयकर में कटौती, ब्याज दरों में कमी और महंगाई पर नियंत्रण, उपभोग बढ़ाने में मदद करेंगे। इसका सीधा असर रिटेल क्रेडिट की मांग पर पड़ेगा।”

एनबीएफसी और इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका

दूसरी छमाही में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को ऋण प्रवाह में भी इज़ाफा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से सीमेंट, स्टील और एल्युमीनियम जैसे उद्योगों को भी बड़े पैमाने पर ऋण मिल सकता है। यह ट्रेंड बैंकिंग सेक्टर के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करेगा।

एमएसएमई और कृषि ऋण

बैंक ऋण का 17 प्रतिशत हिस्सा बनाने वाले एमएसएमई सेक्टर को लेकर रिपोर्ट का अनुमान है कि इसकी वृद्धि लगभग 14 प्रतिशत पर स्थिर रह सकती है। डिजिटलीकरण और औपचारिकरण ने बैंकों को इस क्षेत्र में बेहतर सेवा देने में सक्षम बनाया है, हालांकि निर्यात पर निर्भर एमएसएमई अभी भी वैश्विक मांग की अनिश्चितताओं का सामना कर सकते हैं।

वहीं, कृषि ऋण में इस साल 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। पर्याप्त मानसून और अच्छी फसल की उम्मीदों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा। इससे ग्रामीण उपभोग में भी बढ़ोतरी संभव है।

चुनौतियाँ और अवसर

विशेषज्ञ मानते हैं कि रेपो रेट कटौती का पूरा असर बैंक लेंडिंग में देखने को मिलेगा। इससे बांड बाजार की ओर खिंचाव कम हो सकता है और ऋण वितरण में गति आएगी। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों की सुस्ती बैंकिंग वृद्धि के लिए चुनौती बनी रह सकती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारत की बैंकिंग प्रणाली दूसरी छमाही में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। रिटेल लोन, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और कृषि ऋण इसके प्रमुख चालक होंगे। क्रिसिल की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि अर्थव्यवस्था की खपत-आधारित गति बैंक ऋण वृद्धि को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है।



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