Friday, July 10, 2026 |
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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत Smartphone Hub बनने की दौड़ में बढ़ता आगे

by Business Remedies
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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत स्मार्टफोन हब बनने की दौड़ में आगे बढ़ रहा है। भारत ने स्मार्टफोन निर्यात में 49 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है, जिससे अप्रैल-अक्टूबर-2025 में निर्यात 10.68 अरब डॉलर से बढक़र 15.95 अरब डॉलर हो गया है। इसी वर्ष अक्टूबर में अमेरिका को भेजे गए स्मार्टफोन का निर्यात सालाना आधार पर तीन गुना से ज्यादा बढक़र 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले साल इसी महीने में यह सिर्फ 46 करोड़ डॉलर था। ये बढ़ोतरी भारतीय मोबाइल उद्योग के लिए बड़ी राहत की बात है। इस वृद्धि में प्रमुख योगदान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत के बढ़ते एकीकरण, बेहतर उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाएं और विश्व की प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियों से मिले निरंतर निवेश की देन है। एप्पल की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके वेंडर जैसे टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन कुल निर्यात में लगभग 75 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। एप्पल ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में आईफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया है। कंपनी की आईफोन17 सीरीज की भी देश में मैन्युफैक्चरिंग की जा रही है। अमेरिका में टैरिफ दबाव के बावजूद स्मार्टफोन्स के निर्यात में बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। देश से स्मार्टफोन्स के निर्यात में आईफोन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एप्पल की बड़ी हिस्सेदारी है। कंपनी के लिए चीन के बाद भारत एक बड़ा मार्केट होने के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग का हब भी बन रहा है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया की सैमसंग ने भी देश में स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया है। इन दोनों कंपनियों को केंद्र सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम से बड़ा फायदा मिला है। भारतीय कंपनियों ने मांग और मूल्य निर्धारण को संतुलित रखते हुए निर्यात को बढ़ाया है। आने वाले समय में भारत पूरी तरह से स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में अव्वल श्रेणी में आ सकेगा।



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