कुंजेश कुमार पतसारिया | वृक्ष ही हमारे जीवन का आधार हैं। वर्तमान समय में भारत में प्लांटेशन की उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि यह तेजी से होते शहरीकरण, बढ़ते वायु प्रदूषण, मृदा अपरदन को रोकने और तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह ना केवल जलवायु संतुलन, बल्कि आर्थिक लाभ (लकड़ी, फल, औषधियां) भी प्रदान करते हैं। पेड़ लगाना किसी को जीवनदान देने जैसा है। हम जो भी पेड़ लगाते हैं, वह समाज का रक्षक बन जाता है। पेड़ हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहता है।
इसी उद्देश्य को लेकर Pushkar में Ajmera Nursery Farm की स्थापना Manoharlal Ajmera ने वर्ष 1989 में अपनी पहली किसान नर्सरी फार्म के रूप में की। इसके बाद पुत्र Vasudev Ajmera के साथ मिलकर वर्ष 1998 में दूसरी, वर्ष 2012 में तीसरी, वर्ष 2018 में चौथी और वर्ष 2024 में पांचवीं नर्सरी फार्म की शुरुआत की गई। इस प्रकार लगातार विस्तार के साथ Pushkar को हरितिमा से सरोबार करने का संकल्प लिया गया।
हर छह महीने में नई-नई पौध तैयार कर कस्टमरों, सामाजिक संगठनों, सार्वजनिक स्थलों व अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाती है। आज नर्सरी में हजारों प्रकार की वैरायटी उपलब्ध है, जिनमें Fruit Plant, Outdoor-Indoor Plant और Medicine Plant की अनेक किस्में शामिल हैं।
यहां से पौधे भारत के विभिन्न राज्यों में Online Amazon के माध्यम से पार्सल द्वारा मंगवाए जाते हैं। खासतौर पर गुलाब, आंवला, गौंदा, फालसे, जामुन और शहतूत की पौध देशभर में भेजी जाती है। Ajmera Nursery Farm की पहचान अब Pushkar तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूर-दराज के जिलों और कई राज्यों में भी स्थापित हो चुकी है।

आपकी शैक्षणिक गतिविधियों को बताएं। कहां से शिक्षा ग्रहण की और कहां तक की है?
मैं M.Com करने के बाद पूरी तरह से नर्सरी के व्यवसाय में आ गया। पुस्तैनी व्यवसाय होने के कारण इसमें मेरी रुचि भी थी।
नर्सरी खोलने की प्रेरणा आपको कहां से मिली? इसका अनुभव कहां से लिया और किस तरह की सेवाएं प्रदान करते हैं?
नर्सरी खोलने की प्रेरणा मुझे पिताजी Manoharlal Ajmera से मिली। उन्हीं से नर्सरी संचालन की विद्या सीखी। Corona काल में हमने गिलोय, नीम, पपीता, गुडेल, अमरूद, स्टुबिया (Diabetes), तुलसी, एलोविरा व मिंट जैसे पौध तैयार कर कस्टमरों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराए। इसके अलावा फूलों, फलों, औषधीय और Indoor-Outdoor सजावटी पौधों की हजारों वैरायटी तैयार कर ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं।
आपकी नर्सरी की क्या विशेषता है, अन्य नर्सरी से कैसे भिन्न है?
हमारी Pushkar की सबसे पुरानी नर्सरी है, जहां हजारों वैरायटी उपलब्ध हैं। हर छह महीने में नई पौध तैयार की जाती है। Outdoor-Indoor पौधों के साथ हैज और बड़े ट्री की भी पर्याप्त वैरायटी उपलब्ध रहती है।
वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर में आपके सामने क्या चुनौतियां आईं और उनका समाधान कैसे किया?
हर व्यवसाय में चुनौतियां आती हैं। हमारा मुख्य ध्यान गुणवत्ता बनाए रखने पर रहता है। हम पौधों का नियमित मेंटनेंस करते हैं और ग्राहकों को पूरी संतुष्टि देने का प्रयास करते हैं।
सामाजिक सरोकार के तहत क्या कार्य किए हैं?
आसपास की गौशालाओं और श्मशानों में नि:शुल्क पौधारोपण करते हैं। सार्वजनिक स्थलों, संस्थाओं और अस्पतालों में रियायती दरों पर पौधारोपण करवाते हैं। पर्यावरण दिवस पर एसोसिएशन के माध्यम से निःशुल्क पौध वितरण भी करते हैं।
आपके आदर्श कौन हैं?
मेरे पिता Manoharlal Ajmera ही मेरे आदर्श हैं। उनके सिद्धांतों और मार्गदर्शन से ही हम व्यवसाय में आगे बढ़ रहे हैं।
भविष्य में व्यवसाय को कहां तक विस्तार देना चाहते हैं?
हमारा लक्ष्य है कि Ajmera Nursery Farm के पौधे भारत के हर कोने तक पहुंचें। Rajasthan के Bhilwara, Udaipur, Jaisalmer, Barmer, Jodhpur के अलावा UP, Etawah, Jharkhand, Odisha और Kotak तक पौध भेजी जा रही है। Pushkar के गुलाब, फालसे, जामुन, शहतूत और गौंदा की पौध अधिकांश राज्यों में डिलीवर की जाती है।
नए युवाओं को क्या सुझाव देना चाहेंगे?
युवाओं से यही कहना चाहूंगा कि वे अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटें। Old is Gold की नीति अपनाएं। Corona के बाद प्रकृति ने भी हमें यही सिखाया है कि पौधारोपण और वृक्षारोपण का महत्व कितना अधिक है।
सरकार से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?
सरकार से हमें फिलहाल कोई विशेष सुविधा नहीं मिलती। सर्दी, गर्मी और पाला पड़ने से नुकसान होता है। हमारी अपेक्षा है कि नर्सरी संचालकों को प्रोत्साहन, सब्सिडी या मुआवजा दिया जाए, ताकि प्लांटेशन को और बढ़ावा मिल सके।

