भारत मेक इन इंडिया की तरफ निरंतर आगे बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण भारतीय खिलौना बाजार में तेजी से वृद्धि मानी जा रही है। यहां से तैयार खिलौने अमेरिका व अन्य देशों में भेजे जा रहे हैं। वहीं चीन से आयातित खिलौनों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी शुल्क और चीनी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने की नीति से भारतीय खिलौना उद्योग को बड़ा फायदा हो रहा है। भारतीय खिलौना निर्माता अब अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं। यह माना जा रहा है कि अमेरिका के सख्त नियमों को पूरा करने में सक्षम करीब 40 कंपनियों की पहचान की गई है, जो जल्द ही निर्यात की प्रक्रिया में शामिल हो सकती हैं। इस समय 20 भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में बड़े पैमाने पर खिलौनों का निर्यात कर रही हैं। इस के अलावा वृद्धि में सरकार की नीतियां, बढ़ते मध्यम वर्ग और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकार ने भारतीय खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खिलौनों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना और खिलौना मेले जैसी पहल भी शुरू की है। सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों को वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता भी प्रदान की है, जिससे खिलौना उद्योग में विकास को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं बदलते परिदृश्य और भारतीय खिलौनों की बढ़ती मांग ने भारतीय खिलौना निर्माताओं को बड़ा बढ़ावा दिया है। वर्ष, 2022 में भारतीय खिलौना बाजार का मूल्य 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो वर्ष, 2028 तक इसके 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। जहां भारत शुद्ध निर्यातक बन गया है और आयात में ५२ फीसदी की गिरावट आई है।

