अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर से भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। चीन पर अमेरिका के भारी शुल्क और चीन की जवाबी कार्रवाई से स्मार्टफोन और लैपटॉप, पर्सनल कंम्यूटर(पीसी) बनाने वाली वैश्विक कंपनियां अपने उत्पादन का पूरा या आंशिक हिस्सा भारत में ट्रांसफर करने पर चर्चा कर रही है। पिछले दिनों जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष, 2025 में चीन की स्मार्टफोन उत्पादन में वैश्विक हिस्सेदारी 64 प्रतिशत थी,जो अमेरिकी टैरिफ और तनाव जारी रहने पर तेजी से घट सकता है। वर्ष,2026 तक वैश्विक स्मार्टफोन उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी तेजी से घटकर 55 प्रतिशत पर आ सकती है। वहीं स्मार्टफोन की बात करें तो वित्त वर्ष, 2025 में अप्रैल से जनवरी के बीच भारत से सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तु के रूप में स्मार्टफोन ने डीजल ईंधन को पीछे छोड़ दिया है। वाणिज्य विभाग के अनुसार, इस अवधि में भारत से 18.31 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन निर्यात किए गए, जबकि डीजल का निर्यात 16.04 अरब डॉलर रहा। जहां पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में स्मार्टफोन निर्यात में चौथे स्थान पर थे लेकिन अब उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। स्मार्टफोन के निर्यात में 54.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 11.83 अरब डॉलर था। कई जानकारों का मानना है कि यह उछाल अमेरिका को निर्यात बढऩे की वजह से भी है। जनवरी, 2025 में अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में 208 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 1.63 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इससे लगता है ट्रंप टैरिफ वॉर में भारत निरंतर स्मार्टफोन के निर्यात में बढ़ोतरी कर आगे कदम बढ़ा रहा है।

