Monday, July 6, 2026 |
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RBI Governor ने भविष्य की चुनौतियों के अहम पहलुओं को रेखांकित किया

by Business Remedies
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punit jain

संचार अब एक अहम उपाय है जिसका इस्तेमाल खासतौर पर बड़े केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत निर्णयों को न्यूनतम दिक्कतों के साथ अपनाने में किया जाता है। हाल के दशकों में केंद्रीय बैंकिंग के आकलन और भविष्य की संभावित चुनौतियों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने काठमांडू में एक भाषण में दिलचस्प ढंग से बात की। इसके कुछ पहलुओं पर व्यापक चर्चा से नीतिगत स्पष्टता बढ़ेगी।

केंद्रीय बैंकों के सामने भी हाल के दशकों में अहम चुनौतियां आईं। अधिकांश केंद्रीय बैंकों के सामने उच्च मुद्रास्फीति की समस्या है, क्योंकि उन्होंने शुरुआती चेतावनी वाले संकेतों को गलत समझा। वैश्विक वित्तीय संकट से तुलना करें तो ये हालात काफी अलग थे। उस समय केंद्रीय बैंक अपस्फीति की स्थिति से बचने की कोशिश कर रहे थे। कुछ बैंकों ने ऋणात्मक ब्याज दर का विकल्प चुना तथा अन्य ने बहुत बड़े पैमाने पर क्वांटिटेटिव ईजिंग को अपनाया, ताकि वास्तविक अर्थव्यवस्था को सामान्य बनाया जा सके।

ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब इनमें से कुछ उपायों पर केवल सैद्धांतिक चर्चा होती थी। हालांकि संकट की प्रकृति अलग थी। वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के तौर तरीकों को कोविड-19 महामारी के दौरान लागू किया गया। उभरते बाजारों के केन्द्रीय बैंकों की स्थिति अधिक जटिल रही है। उनको विकसित देशों में विस्तारित अवधि तक लागू नीतियों के छिटपुट प्रभाव से भी निपटना पड़ा है।

2013 में टैपर टैंट्रम (फेडरल रिजर्व द्वारा बॉन्ड खरीद कम करने की घोषणा के बाद मची उथलपुथल) के बाद भारतीय नीति निर्माताओं ने वृहद आर्थिक स्थिरता मजबूत करने पर ध्यान दिया। इससे भारत को हाल के वर्षों में वैश्विक प्रभावों से निपटने में मदद मिली। दास ने भविष्य की चुनौतियों के अहम पहलुओं को भी रेखांकित किया।
जलवायु परिवर्तन नीतिगत जटिलता बढ़ा सकता है। इससे कीमतों और मूल्य स्थिरता दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। भारतीय संदर्भ में जहां खाद्य पदार्थ खपत का एक बड़ा हिस्सा हैं वहीं जलवायु झटके शीर्ष मुद्रास्फीति दर को लंबी अवधि तक ऊपर रख सकते हैं और नीतिगत प्रतिक्रिया में वृद्धि का त्याग करना पड़ सकता है।
निरंतर भूराजनीतिक तनाव के कारण गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला और पूंजी प्रवाह बाधित हो सकता है। एक अन्य पहलू है तकनीक का विकास। तकनीक ने हाल के वर्षों में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र का चेहरा बदल दिया है और उसने वित्तीय समेकन बढ़ाने में मदद की है।



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