Wednesday, August 12, 2026 |
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फाइनेशल कंडिशंस में बदलाव की शुरुआत

by Business Remedies
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punit jain

चीन और यूरोप जैसे कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती की है। इसका कारण है कि वैश्विक वित्तीय बाजार में डॉलर का दबदबा है और अमेरिका में मौद्रिक सख्ती खत्म होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फाइनेशल कंडिशंस में बदलाव की शुरुआत हो गई है। वहीं अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले हफ्ते ब्याज दरों में कटौती के चक्र की शुरुआत कर दी है, जिसका काफी समय से इंतजार था। उसने ब्याज दरों में आधा फीसदी की कमी की। अमेरिका में मौद्रिक नीति में बदलाव क्यों आया? फेडरल रिजर्व के दो दायित्व हैं। पहला अधिकतम रोजगार के लायक हालात बने रहें। दूसरा महंगाई दर एक दायरे में रहे। फेडरल रिजर्व ने बताया कि दोनों जिम्मेदारियों को लेकर अभी जो रिस्क है, वह करीब-करीब संतुलित है। महंगाई घट रही है, लेकिन रोजगार में कमी आ रही है। दुनिया के शेयर बाजारों की नजर भी फेडरल रिजर्व पर रहती है। उसकी कमिटी के मेंबर जो आर्थिक अनुमान पेश करते हैं, वह उनके पिछले अनुमानों से कैसे अलग हैं, बाजार इसे देखकर अपना रास्ता तय करता है। तो इस बार जो अनुमान पेश किए हैं, उनमें 2024 और 2025 के लिए महंगाई दर के मौजूदा लेवल से नीचे रहने की बात कही गई है। दूसरी ओर इस साल के अंत और अगले साल में बेरोजगारी दर बढऩे की आशंका है। वर्ष, 2024 में उन्होंने बेरोजगारी दर का अनुमान 4.4 फीसदी का रखा है, जबकि अगले साल के लिए भी इसके सामान्य से ऊपर रहने का डर है। अभी यह 4.2 फीसदी के करीब है। इसलिए इस साल के बचे हुए महीनों और अगले साल में ब्याज दरों में और कमी किए जाने की संभावना है। अमेरिका में हुए इस बदलाव से भारतीय बाजार में पिछले कुछ महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था में कुछ सुस्ती आई है। इसके तीन कारण हैं पहला चुनाव की वजह से केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से खर्च में बढ़ोतरी नहीं हुई। दूसरा इकोनॉमी में मनी सप्लाई की ग्रोथ में बड़ी गिरावट आई है। तीसरा वैश्विक मांग के कमजोर पडऩे और चीन की वजह से निर्यात क्षेत्र पर बुरा असर पड़ा है। समय के साथ सरकारी खर्च बढऩे से पहली मुश्किल हल हो जाएगी। इसके शुरुआती संकेत दिखने भी लगे हैं। दूसरी समस्या इस डर की वजह से थी कि मनी सप्लाई बढऩे से सट्टेबाजी के कारण करंसी में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। लेकिन पिछले दो महीने से भी अधिक समय में रिजर्व बैंक ने ओवरनाइट मनी सप्लाई को सरप्लस बनाए रखा है। इससे उसने आने वाले वक्त को लेकर बदले रुख का संदेश भी दे दिया है।



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