Wednesday, August 12, 2026 |
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पाली औद्योगिक क्षेत्र में दो ही Treatment Plant चालू

कुल छह Treatment Plant बने हुए हैं Pali Industrial Area में

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण को कम करने व पानी की शुद्धता को बढ़ाने के लिए Common Effluent Treatment Plant (CETP) बनाए गए हैं, लेकिन अनदेखी के चलते इन ट्रीटमेंट प्लांटों की हालत इन दिनों खस्ता हैं। पाली औद्योगिक क्षेत्र में कुल छह ट्रीटमेंट प्लांट बने हुए हैं। इनमें से केवल दो ही चालू हैं। बाकी चार प्लांट बंद पड़े हैं। सरकार व रीको को इस विषय में सोचना चाहिए और औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त करने के बारे में सोचना चाहिए।

पाली में तैयार हुआ देश का पहला अनूठा ट्रीटमेंट प्लांट
पाली में बनाए गए इस प्लांट में 12 MLD water treatment कर वापस फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जा रहा है। प्लांट बनने से पहले पाली औद्योगिक क्षेत्र लंबे समय तक जल प्रदूषण की समस्या से दो-चार था। अब ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रोजेक्ट’ तैयार किया गया है। इस प्लांट से क्षेत्र में बह रही बांडी नदी को भी प्रदूषित पानी से राहत मिली है। यह देश का ऐसा पहला कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट है जो डीएएफ तकनीक से बना है। इसमें विदेशी मशीनें लगाई गई हैं। यह प्लांट प्रदूषित पानी को 3 चरणों में शुद्ध करके बाहर निकालता है। इसमें से 93 फीसदी पानी का रीयूज होता है। दरअसल टैक्सटाइल फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी की मार झेल रहे पाली में इसके बनने के बाद शहर समेत आसपास के क्षेत्रों की हजारों बीघा जमीनें खराब होने से बच रही है।

NGT के प्रयास लाए रंग
NGT ने पाली शहर समेत आसपास के 60 किलोमीटर दायरे में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी से पर्यावरण को बचाने के लिए सख्ती की। इसके बाद सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) से रसायन युक्त पानी को साफ करके उसे पुर्नउपयोग लायक बनाया जा रहा है। इसके लिए जीरो लिक्विड डिसचार्ज प्रोजेक्ट की तकनीक अपनाई जा रही है।

पूरा 12 MLD पानी वापस फैक्ट्रियों में सप्लाई हो रहा
रीयूज हो सकने वाले पानी को छोडक़र शेष केमिकल वेस्ट को एमईई में डालकर नमक बनाया जा रहा है। यह केमिकल के रूप में काम आ रहा है। अब सभी फैक्ट्रियों का पूरा 12 एमएलडी पानी वापस फैक्ट्रियों में सप्लाई हो रहा है। यानी गंदा पानी अब नदी में नहीं जा रहा है।

प्रोजेक्ट पर करीब 100 करोड़ की लागत
इस प्लांट पर करीब 100 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इसमें चार प्रमुख विदेशी मशीनें आधुनिक तकनीक से पानी को साफ कर रही हैं। इसमें यूएफ, मेमरन, एनर्जी सेविंग टर्बो पंप और मल्टी इफेक्टिव एवोब्रेटर मशीन पूरी तरह से पानी को साफ कर रीयूज करने लायक बनाएगी। ये चारों मशीनें जापान, यूएस और कनाडा से आई थीं।

 

पाली औद्योगिक क्षेत्र में अभी दो प्लांट 12 एमएलडी क्षमता के चालू हैं। बाकी चार प्लांट अभी बंद पड़े हैं। जो प्लांट चालू हैं, उनमें से 12 एमएलडी पानी रिसाइकिल होकर वापस इंडस्ट्री को जा रहा है। इसके अलावा 12 एमएलडी पानी हम कार्य में ले रहे हैं। इनके अलावा 12 एमएलडी का एक प्लांट मंड्या रोड पर है, उसे भी चालू कराने की योजना है। यह कार्य भी करीब दो महीने में चालू हो जाएगा।

•⁠ ⁠अशोक लोढा, अध्यक्ष, सीईटीपी, पाली

पाली औद्योगिक क्षेत्र में कुल छह प्लांट बने हुए हैं। वर्तमान में इनमें से केवल दो ही प्लांट चल रहे हैं। इन दोनों प्लांटों की क्षमता 12-12 एमएलडी पानी की है, जो प्लांट अभी बंद हैं, उनका अपग्रेडेशन का कार्य शुरू हो रहा है। जल्द ही ये प्लांट भी चालू हो जाएंगे। क्षेत्र में अवैध इंडस्ट्री बड़ी मात्रा में चलती हैं। इस कारण समस्याएं आती हैं। अगर व्यक्तिगत रूप से प्लांट लगाएं तो उनकी कॉस्ट बहुत ज्यादा पड़ती है। इसलिए ट्रीटमेंट प्लांट की कॉस्ट कम करने के लिए पॉलिसी बननी चाहिए और सभी इंडस्ट्री को इससे जोड़ा जाना चाहिए।

•⁠ ⁠विनय बंब, अध्यक्ष, राजस्थान टैक्सटाइल मैन्यूफ्रेक्चर्स एसोसिएशन, पाली

 

पाली में फिलहाल दो सीईटीपी ही चालू हैं। पाली की सभी इंडस्ट्री का पानी इन सीईटीसी में जाता है। इन सीईटीपी की क्षमता 12 एमएलडी पानी प्रति है। इसके अलावा व्यक्तिगत फैक्ट्रियों में भी 20-25 प्लांट लगे हुए हैं। ये सभी प्लांट सही ढंग से कार्य कर रहे हैं। बाकी सीईटीपी का रेनोवेशन का का कार्य चल रहा है। ये भी जल्द चालू हो जाएंगी।
•⁠ ⁠नरेश मेहता, पार्टनर, मेघा टैक्स प्रिंट, पाली



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