Saturday, July 11, 2026 |
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वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध को दूर करने का प्रयास

by Business Remedies
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punit jain

आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के सिलसिले में वियतनाम गए विदेश मंत्री एस जयशंकर की चीनी विदेश मंत्री वांग यी से हुई मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण है। यह एक महीने के अंदर ही दूसरा मौका है, जब दोनों नेताओं ने मिलकर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले चार वर्षों से जारी गतिरोध को दूर करने के उपायों पर बातचीत की है।

दोनों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि आपसी संबंधों को स्थिरता देना भारत और चीन के हित में है, लेकिन इस लक्ष्य की ओर बढऩे के तरीकों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं। चीन ने इस बार भी यह संकेत दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जो हालात हैं, उसे न्यू नॉर्मल मानकर रिश्तों को सामान्य बनाने की ओर कदम बढ़ाना ठीक रहेगा। लेकिन जयशंकर ने भारत के इस रुख को फिर स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और वास्तविक नियंत्रण रेखा के लिए सम्मान सुनिश्चित करके ही रिश्तों को सामान्य बनाया जा सकता है।

हालांकि दुनिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत में भी इस बात का अहसास बढ़ता जा रहा है कि सीमा से जुड़े मसलों को दोनों देशों के व्यापारिक सहयोग में ज्यादा समय तक आड़े आने देना अच्छा नहीं है। अलग-अलग थिंक टैंकों या खास समूहों की तरफ से उठाई जा रही यह बात अब सरकार की ओर से भी कही जाने लगी है। इसी का ताजा उदाहरण है कि पिछले दिनों संसद में पेश किए आर्थिक सर्वे में चीन से होने वाले प्रत्यक्ष विदेश निवेश को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके पीछे अमेरिका और यूरोपीय देशों की चाइना प्लस वन पॉलिसी का फायदा उठाने की भावना हो सकती है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर लगे प्रतिबंधों से उपजी परिस्थितियों में भारत ने उससे सस्ती दरों पर कच्चा तेल लेना और उसे रिफाइन करके अन्य देशों को भेजना शुरू करने में देर नहीं लगाई। इससे सभी संबंधित पक्षों को फायदा हुआ। यह एक तरह से पश्चिमी देशों की रूस प्लस वन पॉलिसी ही थी जिसका भारत ने फायदा उठाया। चाइना प्लस वन की जहां तक बात है तो मेक्सिको, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देश तो उसका फायदा उठा रहे हैं, लेकिन भारत उनके मुकाबले में काफी पीछे है।

बहरहाल, भारत अपनी सुरक्षा और भू-राजनीति से जुड़े हितों की अनदेखी नहीं कर सकता। ऐसे में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सामान्य हालात बहाल करने के सवाल को ठंडे बस्ते में डालने की चीनी पेशकश तो स्वीकार नहीं की जा सकती, लेकिन वहां जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो इसके प्रयास तेज जरूर किए जा सकते हैं।



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