बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
एचएमएसआई का मानना है कि सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। सडक़ सुरक्षा जागरुकता की पहुंच को लाखों नागरिकों तक सुनिश्चित करने के लिए कंपनी नियमित रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में सडक़ सुरक्षा जागरुकता अभियानों का आयोजन करती है। ऐसे ही एक अभियान का आयोजन हाल ही में जयपुर शहर में हुआ, जिसने प्रतिभागियों पर गहरी छाप छोड़ी। कैम्ब्रिज कोर्ट हाई स्कूल के मैदान में आयोजित इस अभियान ने एचएमएसआई के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की, जिसमें 2200 से अधिक स्कूली छात्रों एवं स्टाफ के सदस्यों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। सडक़ सुरक्षा अभियान में कई रोचक गतिविधियों जैसे सेफ्टी राइडिंग थ्योरी सैशन, खतरे का अनुमान लगाने के लिए प्रशिक्षण, सडक़ सुरक्षा क्विज़, हेलमेट पर जागरुकता और राइडिंग ट्रेनर सैशन का आयोजन किया गया। इन गतिविधयों ने पूरे अभियान के दौरान प्रतिभागियों को सक्रियता के साथ जोड़े रखा।
एचएमएसआई का मानना है कि बच्चे समाज का भविष्य हैं और उन्हें शुरूआती उम्र में ही सडक़ सुरक्षा पर जागरुक बनाने से वे सडक़ों को दुर्घटनामुक्त बनाने में योगदान दे सकते हैं। कंपनी नियमित रूप से रोचक एवं इंटरैक्टिव सडक़ सुरक्षा जागरुकता प्रोग्रामों का आयोजन करती है। बच्चों से लेकर युवाओं तक हर आयु वर्ग के लिए इस तरह के प्रोग्रामों का आयोजन स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में किया जाता है। एचएमएसआई कैम्ब्रिज कोर्ट हाई स्कूल के अधिकारियों के प्रति आभारी है, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के आयोजन के लिए अपना सहयोग दिया। एक साथ मिलकर हम सडक़ों को सुरक्षित बनाने तथा दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अपनी शुरूआत के बाद से एचएमएसआई सडक़ के जि़म्मेदाराना उपयोग और सुरक्षित राइडिंग की आदतों को बढ़ावा देते हुए राजस्थान में तकरीबन 3 लाख व्यस्कों एवं बच्चों को सडक़ सुरक्षा शिक्षा प्रदान कर चुकी है। इसके अलावा एचएमएसआई अपनी सडक़ सुरक्षा शिक्षा पहलों के साथ देश भर में 60 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच चुकी है।
सडक़ सुरक्षा के लिए होण्डा मोटरसाइकिल एण्ड स्कूटर इंडिया की सीएसआर प्रतिबद्धता : साल 2021 में होण्डा ने विश्वस्तर पर एक दृष्टिकोण वक्तव्य जारी किया जिसके मुताबिक होण्डा 2050 तक दुनिया भर में होण्डा की मोटरसाइकिलों एवं ऑटोमोबाइल्स की जानलेवा दुर्घटनाओं को शून्य तक लाने के लिए प्रयास करेगी। एचएमएसआई इसी दृष्टिकोण से भारत सरकार के साथ काम करते हुए 2030 तक दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को आधा करने की दिशा में कार्यरत है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 2030 तक हमारे बच्चों में सडक़ सुरक्षा के प्रति सकारात्मक मानसिकता का विकास किया जाए और इसके बाद भी उन्हें इस विषय पर शिक्षित करना जारी रखा जाए। स्कूलों एवं कॉलेजों में सडक़ सुरक्षा की शिक्षा न सिर्फ जागरुकता बढ़ाती है बल्कि युवाओं में सुरक्षा की भावना को भी बढ़ावा देती है, इस तरह वे सुरक्षा का संदेश देने वाले दूत बन जाते हैं। यह भावी पीढिय़ों को जि़म्मेदार नागरिक बनकर सुरक्षित समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए सक्षम बनाती है।

