वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया भू-राजनीतिक तनावों, युद्धों, क्षेत्रीय संघर्षों और आपसी वैमनस्य के दौर से गुजर रही है, तब मानवता के समक्ष शांति और सह-अस्तित्व की स्थापना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में, वैश्विक पटल पर शांति के संदेश को पुनर्जीवित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। आज के दिन अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाने का प्रमुख कारण विश्व में अहिंसा और संघर्ष-विराम के आदर्श को बढ़ावा देना है। यह दिन राष्ट्रों को आपसी विवादों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण माध्यमों से करने की प्रेरणा देता है। यह दिवस मनुष्य को यह सोचने पर विवश करता है कि हथियार और युद्ध कभी भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से वर्ष 1981 में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव के माध्यम से की गई थी। पहला शांति दिवस 1982 में मनाया गया। इस दिन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शांति घंटी बजाई जाती है, जो दुनिया भर में शांति और संघर्ष-विराम का प्रतीक है। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष की थीम शांति में निवेश—हर व्यक्ति, हर जगह, हर दिन रखी है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर, मानवाधिकार और सहयोग की वह स्थिति है, जिसमें समाज और व्यक्ति विकास कर सकें। शांति केवल सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल और समाज में सम्मान, संवाद तथा सहिष्णुता को बढ़ावा देना भी शांति में निवेश है। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर हिंसा के स्थान पर संवाद और विभाजन के स्थान पर सहयोग को चुनने का प्रयास करे, तो शांति दिवस एक तारीख भर ना रहकर मानवीय जीवन का निरंतर संकल्प बन सकता है।

