हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष,2007 में इस दिवस की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिकों की भागीदारी, मानवाधिकारों, स्वतंत्रता और सुशासन के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। लोकतंत्र केवल सरकार चुनने की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों को अपने भविष्य और शासन में भागीदारी का अधिकार देने वाली व्यवस्था है। लोकतांत्रिक देश होना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें सत्ता का आधार जनता की इच्छा होती है। नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और आवश्यकता पडऩे पर सत्ता परिवर्तन का अधिकार मिलता है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समान नागरिक अधिकार लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं। इसके विपरीत जब सत्ता पर जनता का नियंत्रण कमजोर होता है, तो निरंकुशता, भ्रष्टाचार और अधिकारों के दमन का खतरा बढ़ जाता है। लोकतंत्र के सबसे प्रमुख फायदों में जनभागीदारी, जवाबदेह सरकार, नागरिक स्वतंत्रता, कानून के सामने समानता और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण शामिल हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाती है। मीडिया, न्यायपालिका, संसद और नागरिक समाज जैसी संस्थाएं सत्ता पर निगरानी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही व्यवस्था गलत नीतियों के विरोध और सुधार का शांतिपूर्ण रास्ता भी उपलब्ध कराती है। आज के दौर में लोकतंत्र का महत्व किसी एक देश तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग, मानवाधिकारों का सम्मान और शांतिपूर्ण संवाद वैश्विक स्थिरता को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि केवल चुनाव होना ही लोकतंत्र की पूर्ण गारंटी नहीं है, लोकतंत्र की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि संस्थाएं कितनी स्वतंत्र हैं और नागरिकों के अधिकार कितने सुरक्षित हैं? लोकतांत्रिक शासन आज भी व्यापक है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और मजबूती देशों के बीच काफी अलग है। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र कोई हासिल कर लेने के बाद समाप्त हो जाने वाली उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर मजबूत की जाने वाली व्यवस्था है। जागरूक नागरिक, स्वतंत्र संस्थाएं और जवाबदेह शासन ही लोकतंत्र को जीवंत बनाते हैं। इसलिए लोकतंत्र की रक्षा केवल सरकारों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

