भारत का मेडिकल उपकरण क्षेत्र तेज़ी से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। FY25 में देश का मेडिकल उपकरण निर्यात बढ़कर $4 Billion तक पहुंच गया है। एक नई Report के अनुसार, भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र का ‘Access-Led Innovator’ माना गया है, जो यह दर्शाता है कि देश सुलभ स्वास्थ्य तकनीकों के विकास और निर्यात में लगातार मजबूत स्थिति हासिल कर रहा है। Bain & Company की Report में बताया गया है कि भारत वर्तमान में 125 से अधिक देशों को मेडिकल उपकरणों का निर्यात कर रहा है। वहीं, देश में उच्च श्रेणी के मेडिकल उपकरणों का आयात $5.5 Billion रहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों के विकास और नवाचार की दिशा में अभी भी बड़े अवसर मौजूद हैं।
यह Report Agency For Science, Technology And Research, Enterprise Singapore, JP Morgan, SG Growth Capital और Singapore Economic Development Board के सहयोग से तैयार की गई है। इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मेडिकल तकनीक बाजारों में शामिल बताया गया है, जहां भारत प्रमुख मांग केंद्र के रूप में उभर रहा है। Report के अनुसार, वर्ष 2030 तक एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वैश्विक मेडिकल तकनीक मांग में हिस्सेदारी बढ़कर $132 Billion तक पहुंचने का अनुमान है। यह बाजार हर वर्ष लगभग 6.9प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है, जो वैश्विक औसत वृद्धि से अधिक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल नए उत्पाद विकसित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि क्लिनिकल प्रमाण, नियामकीय रणनीति, व्यावसायीकरण और बाजार तक पहुंच को भी मजबूत बनाना होगा। यही पहलू भविष्य में इस क्षेत्र की वास्तविक प्रगति तय करेंगे। Report में यह भी कहा गया है कि सीमित संसाधनों वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत में विकसित किए गए समाधान अब वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए जा रहे हैं। भारतीय कंपनियां यह साबित कर रही हैं कि कम लागत और बड़े स्तर पर उत्पादन की क्षमता के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा भी हासिल की जा सकती है।
Bain & Company के भारत में Healthcare & Life Sciences प्रमुख ध्रुव सुखरानी ने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही अगले कुछ वर्षों में देश का स्वास्थ्य सेवा बाजार $320 Billion से अधिक का हो सकता है, जिसमें लगभग 10 प्रतिशत से 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि रहने का अनुमान है। इससे मेडिकल तकनीकों की मांग को मजबूत गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक भारत के लिए मेडिकल तकनीक क्षेत्र में लगभग $35 Billion का अवसर तैयार हो सकता है। साथ ही, मेडिकल उपकरण निर्यात में 2030 तक हर वर्ष 20 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वृद्धि दर रहने की संभावना है, जिससे निर्यात बढ़कर $8 Billion तक पहुंच सकता है। ध्रुव सुखरानी ने यह भी कहा कि भविष्य की सफलता केवल बड़े स्तर पर विनिर्माण क्षमता बढ़ाने से नहीं मिलेगी। भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए क्लिनिकल अनुसंधान, नियामकीय क्षमता और व्यावसायीकरण के क्षेत्र में भी मजबूत नवाचार विकसित करने होंगे।

