नई दिल्ली: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब योग्य कर्मचारियों की कमी बनती जा रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 45प्रतिशत कंपनियों ने एआई, डिजिटल और डाटा स्किल्स की कमी को अपनी सबसे बड़ी वर्कफोर्स बाधा बताया है।
‘एसएचआरएम इंडिया स्किल इंटेलिजेंस रिपोर्ट 2026’ में सामने आया है कि देश की करीब 54प्रतिशत कंपनियां अभी भी एआई निवेश को लेकर मध्यम या कम स्तर की तात्कालिकता महसूस कर रही हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि कई संस्थाएं नई तकनीकों को अपनाने की गति में अभी पीछे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रीन और ईएसजी क्षमताओं में भी बड़ी कमी देखने को मिल रही है। लगभग 41प्रतिशत कंपनियों ने माना कि उनके पास इस क्षेत्र में पर्याप्त कुशल प्रतिभा नहीं है। केवल 14 में से 1 संस्था ही ईएसजी टैलेंट क्षमता के मामले में उन्नत श्रेणी में पहुंच पाई है, जबकि 31प्रतिशत संस्थाएं अभी केवल जागरूकता और योजना के चरण में हैं।
कर्मचारियों की स्किल्स बढ़ाने के लिए किए जा रहे निवेश की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 60प्रतिशत लर्निंग एंड डेवलपमेंट बजट केवल डिजिटल सेल्फ-पेस्ड कंटेंट और क्लासरूम ट्रेनिंग पर खर्च किया जा रहा है। इससे व्यावहारिक और भविष्य के अनुरूप प्रशिक्षण पर सीमित ध्यान दिखाई देता है।
गिग वर्कफोर्स मॉडल को लेकर भी कंपनियों में भरोसे की कमी बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 53प्रतिशत बाधाएं स्किल क्वालिटी और करियर निरंतरता से जुड़ी हैं, जबकि केवल 13प्रतिशत कंपनियों ने नियामकीय जटिलताओं को समस्या बताया। इसका मतलब है कि कंपनियां नियमों से ज्यादा कर्मचारियों की गुणवत्ता और स्थिरता को लेकर चिंितत हैं।
एसएचआरएम एपीएसी और मेना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अचल खन्ना ने कहा कि भारत अपनी वर्कफोर्स परिवर्तन यात्रा के बेहद महत्वपूर्ण दौर में खड़ा है। उन्होंने कहा कि कंपनियां एआई, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी में तेजी से निवेश कर रही हैं, लेकिन असली अंतर वही संस्थाएं पैदा करेंगी जो बड़े स्तर पर भविष्य के लिए तैयार स्किल्स विकसित कर पाएंगी।
एसएचआरएम के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉनी सी टेलर जूनियर ने कहा कि दुनिया भर में कंपनियां इस चुनौती का सामना कर रही हैं कि तेजी से बदलते कामकाजी माहौल के लिए लोगों और संस्थाओं को कैसे तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स और तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल इकोसिस्टम है, जो उसे भविष्य के टैलेंट निर्माण में वैश्विक उदाहरण बनने का अवसर देता है। .3
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कंपनियों को स्किल्स की समस्या का एहसास तो है, लेकिन बड़े स्तर पर उस पर प्रभावी कार्रवाई करने की उनकी क्षमता अभी काफी कमजोर बनी हुई है।

