नई दिल्ली, देश में स्वच्छ ईंधन के बढ़ते उपयोग को समर्थन देने और माप-तौल व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने Legal Metrology (Government Approved Test Centre) Rules, 2013 में संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से देशभर में ईंधन डिस्पेंसर की जांच और पुनः जांच प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
सरकार ने अब Government Approved Test Centres (GATCs) के दायरे को बढ़ाते हुए अतिरिक्त ईंधन डिस्पेंसिंग सिस्टम्स को भी शामिल कर लिया है। इसके तहत अब पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, LNG और Hydrogen डिस्पेंसर की जांच और पुनः जांच अधिकृत केंद्रों द्वारा की जा सकेगी। इससे देशभर में सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। नए नियमों के तहत राज्य सरकारों को भी अधिकार दिया गया है कि वे अपने-अपने नियमों के अनुसार अतिरिक्त माप और तौल उपकरणों को GATCs के माध्यम से सत्यापन के लिए अधिसूचित कर सकें। इससे राज्यों को स्थानीय स्तर पर व्यवस्था मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर की जांच शुल्क ₹. 5,000 प्रति नोजल तय किया है। वहीं CNG, LPG, LNG और Hydrogen डिस्पेंसर के लिए यह शुल्क ₹. 10,000 प्रति नोजल निर्धारित किया गया है। संशोधित नियमों के अनुसार अब पांच नई श्रेणियों के डिस्पेंसिंग सिस्टम्स को GATCs के अंतर्गत शामिल किया गया है। इनमें पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर, CNG डिस्पेंसर, LPG डिस्पेंसर, LNG डिस्पेंसर और Hydrogen डिस्पेंसर शामिल हैं।
इन नई श्रेणियों को जोड़ने के बाद अब GATCs के माध्यम से कुल 23 प्रकार के माप और तौल उपकरणों की जांच और पुनः जांच की जा सकेगी। उपभोक्ता मामलों विभाग के अनुसार इससे देश की सत्यापन क्षमता में बड़ा विस्तार होगा। GATCs ऐसे अधिकृत केंद्र होते हैं जिनके पास आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध होता है। ये केंद्र Legal Metrology Act और संबंधित नियमों के तहत निर्धारित उपकरणों की जांच और पुनः जांच का कार्य करते हैं।
सरकार का मानना है कि निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी से जांच सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और पूरे देश में पारदर्शिता बढ़ेगी। विशेष रूप से CNG, LNG और Hydrogen जैसे स्वच्छ ईंधनों के तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से ईंधन की सटीक मात्रा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और ग्राहकों को लेनदेन में अधिक पारदर्शिता प्राप्त होगी। साथ ही यह कदम स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भरोसा बढ़ाने और आधुनिक ईंधन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

