दुनिया भर में माताओं के नि:स्वार्थ प्रेम, बलिदान और उनके द्वारा समाज में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मानित करने का दिन मातृ दिवस आज मनाया जाएगा। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मां के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मां का योगदान जीवन में अमूल्य और अनुपम है। वर्ष,1908 में अन्ना जार्विस नाम की अमेरिकी महिला ने अपनी मां एन रीव्स जार्विस की याद में पहला मातृ दिवस मनाया। एन जार्विस एक सोशल एक्टिविस्ट थीं, जो गृहयुद्ध में घायल सैनिकों की सेवा करती थीं। पहला आयोजन 10 मई, 1908 को अन्ना ने वेस्ट वर्जीनिया के ग्राफ्टन चर्च में अपनी मां के सम्मान में प्रार्थना सभा रखी। उन्होंने मां के पसंदीदा सफेद कारनेशन फूल बांटे। इसलिए आज भी सफेद कारनेशन मातृ दिवस का प्रतीक है। वहीं आधुनिक मातृ दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका में हुई। इसका श्रेय अन्ना जार्विस को जाता है, जिन्होंने अपनी मां के निधन के बाद माताओं के सम्मान में एक विशेष दिन मनाने की पहल की थी। वर्ष,1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को आधिकारिक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। यह उनके समर्पण, प्यार और घर-परिवार में उनके योगदान को मान्यता देता है। इस दिन लोग अपनी मां को उपहार, फूल, कार्ड देते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उनके लिए विशेष भोजन बनाते हैं। भारत में यह दिन बच्चों के लिए अपनी मां को खास महसूस कराने और उनके प्रति प्यार जताने का एक भावनात्मक अवसर है। वहीं रामचरितमानस और अन्य भारतीय ग्रंथों में भी मां की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है।

