New Delhi,
देश का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत स्थिति में बना हुआ है और इसमें स्थिरता साफ तौर पर दिखाई दे रही है। हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, बेहतर संपत्ति गुणवत्ता, मजबूत पूंजी आधार, खुदरा और छोटे उद्योगों को दिए जा रहे ऋण में तेजी, और निजी निवेश में शुरुआती सुधार जैसे कारक इस मजबूती के प्रमुख कारण हैं। यह सर्वेक्षण उद्योग संगठन फिक्की और भारतीय बैंक संघ द्वारा किया गया है, जिसमें बताया गया कि निकट भविष्य में ऋण वृद्धि को लेकर बैंकिंग क्षेत्र का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार, अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधियां और विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मांग इस वृद्धि को समर्थन दे रही हैं।
मौद्रिक नीति स्थिर रहने की उम्मीद
सर्वे में शामिल बैंकों का मानना है कि आने वाले महीनों में मौद्रिक नीति में ज्यादा बदलाव नहीं होगा और यह वर्तमान ढांचा विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उपयुक्त है। हालांकि, सहकारी बैंकों के मामले में सभी प्रतिभागियों ने 25 आधार अंक की दर वृद्धि की संभावना जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल ऋण विस्तार को लेकर उम्मीदें सकारात्मक बनी हुई हैं। विशेष रूप से गैर-खाद्य ऋण में निरंतर वृद्धि की संभावना जताई गई है, जो बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
सरकारी बैंकों का आत्मविश्वास मजबूत
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भविष्य को लेकर विशेष आत्मविश्वास देखा गया है। इसका कारण बेहतर संपत्ति गुणवत्ता, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट क्षेत्र को दिए जा रहे ऋण में बढ़ती सक्रियता है। वहीं निजी बैंकों ने ऋण वृद्धि के मामले में संतुलित और चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट और संस्थागत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए मध्यम स्तर का आशावाद दिखा रहे हैं।
सेवा और खुदरा क्षेत्र से बढ़ेगी मांग
क्षेत्रवार विश्लेषण में सामने आया है कि सेवा और खुदरा क्षेत्र से ऋण की मांग आगे भी मजबूत बनी रहेगी। सेवा क्षेत्र में रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन उद्योग में गतिविधियों के कारण विस्तार की उम्मीद जताई गई है। करीब 46 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि गैर-खाद्य ऋण वृद्धि 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जो इस सर्वे में प्रमुख धारणा के रूप में उभरी है।
छोटे उद्योगों को ऋण में तेज बढ़त की संभावना
छोटे और मध्यम उद्योगों को दिए जाने वाले ऋण में भी तेज वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। इसके पीछे छोटे कारोबारों में बढ़ती गतिविधियां, ऋण प्रक्रिया का औपचारिक होना और सरकारी नीतियों का समर्थन प्रमुख कारण हैं। बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में साइबर सुरक्षा जोखिम सामने आया है। सर्वेक्षण में 24 बैंकों ने हिस्सा लिया, जिसमें सरकारी बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, लघु वित्त बैंक और सहकारी बैंक शामिल थे। यह सर्वे जनवरी से फरवरी 2026 के बीच किया गया।

