Sunday, July 5, 2026 |
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भारत का Tax-To-GDP Ratio 19.6 प्रतिशत पर पहुंचा

आगे बढ़त के लिए Structural Reforms अहम

by Business Remedies
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India Tax-To-GDP Ratio Growth Chart Showing Fiscal Reform Impact

नई दिल्ली,

भारत का संयुक्त Tax-To-GDP Ratio बढ़कर 19.6 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा देश को कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बराबर खड़ा करता है और कर संग्रह व्यवस्था में लगातार सुधार को दर्शाता है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक Report में दी गई है। Report के अनुसार, इस अनुपात में केंद्र और राज्यों दोनों के कर संग्रह शामिल हैं। यह अनुपात हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे कई उभरते बाजारों से अधिक है। हालांकि, केंद्र का सकल कर राजस्व सकल घरेलू उत्पाद का 11.7 प्रतिशत है, लेकिन राज्यों की मजबूत भागीदारी और बेहतर अनुपालन के कारण समग्र आंकड़ा अधिक दिखाई देता है।

इसके बावजूद भारत अभी भी जर्मनी जैसे विकसित देशों से पीछे है, जहां Tax-To-GDP Ratio लगभग 38 प्रतिशत है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका में यह अनुपात करीब 25.6 प्रतिशत है। Report में कहा गया है कि यह अंतर भारत के लिए एक बड़ी नीतिगत संभावना प्रस्तुत करता है, खासकर देश की अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति को देखते हुए। Report में बताया गया है कि सरकार व्यापक कर सुधारों पर लगातार ध्यान दे रही है। इन सुधारों का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, संरचना को तर्कसंगत करना और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करना है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों से Tax-To-GDP Ratio में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

महत्वपूर्ण नियामकीय कदमों में Income Tax Act, 2025 की शुरुआत और कॉरपोरेट कर ढांचे का तर्कसंगत पुनर्गठन शामिल है। नया Income Tax Act 1April2026 से लागू होने की संभावना है। इससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुपालन को आसान बनाया जाएगा। साथ ही, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को औपचारिक व्यवस्था में लाने से कर आधार का विस्तार होने की उम्मीद है। Report के ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार, समय के साथ कर संग्रह और नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद के बीच संबंध अधिक मजबूत हुआ है। FY93 से FY02 के बीच यह संबंध अस्थिर रहा, जिसका कारण सीमित कर आधार था। हालांकि, FY14 के बाद से दोनों के बीच स्पष्ट सामंजस्य देखा गया है, जो FY23 के बाद और अधिक मजबूत हुआ है।

वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि कर लचीलापन लगभग 1.1 के स्तर पर है, जो दीर्घकालिक औसत से अधिक है। इसका अर्थ है कि कर संग्रह अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से तेज गति से बढ़ रहा है। Report में यह भी पाया गया कि विभिन्न कर घटकों और व्यापक आर्थिक संकेतकों के बीच मजबूत सकारात्मक संबंध है। आयकर संग्रह का नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय के साथ गहरा संबंध दिखाई देता है, जो बढ़ती आय और बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

कॉरपोरेट कर संग्रह में भी कंपनियों की बेहतर लाभप्रदता का लाभ मिला है। ऐतिहासिक रुझानों की तुलना में कर संग्रह की उछाल मजबूत बनी हुई है।



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