भारत में एआई के बढ़ते चरण से वर्ष, 2026 में कई फायदे होने वाले हैं। सरकार ने करीब साढ़े दस करोड़ रुपए का निवेश एआई मिशन में किया है, जिससे ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स का उपयोग करके एआई की पहुंच बढ़ाई जा रही है। इससे भारत में एआई की गति तेज होगी और इसका लाभ देश के विभिन्न क्षेत्रों में होगा। एआई का उपयोग फसल की उत्पादकता बढ़ाने, मौसम की भविष्यवाणी करने और कीटों की पहचान करने में किया जा रहा है। एआई का उपयोग शिक्षा प्रणाली में सुधार करने, व्यक्तिगत शिक्षा प्रदान करने और शिक्षकों की सहायता करने में किया जा रहा है। एआई का उपयोग रोगों की पहचान करने, उपचार की योजना बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जा रहा है। वहीं इसका उपयोग सरकारी सेवाओं को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने में हो रहा है। भारत ने पहले ही स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवाओं जैसे अहम क्षेत्रों में एआई का उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर प्रभावी समाधान लागू किए हैं, जिनका लाभ करोड़ों लोगों तक पहुंचा भी है। डिजिटल तकनीक को जनकल्याण से जोडऩे के इस अनुभव ने भारत को एक भरोसेमंद उदाहरण के रूप में पेश किया है। जहां वर्ष, 2023 में जी20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक सार्वजनिक संसाधन के रूप में प्रस्तुत कर विकासशील देशों के लिए समावेशी डिजिटल विकास का रास्ता दिखाया है। इसके बाद 2025 में पेरिस एआई एक्शन समिट में भारत ने जिम्मेदार, सुरक्षित और मानव-केंद्रित एआई को लेकर वैश्विक विमर्श को दिशा देने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता और मजबूत हुई है। एक ओर उसकी घरेलू एआई क्षमता तेजी से बढ़ रही हैं, तो दूसरी ओर उसकी वैश्विक भूमिका भी मजबूत हो रही है। जहां भारत इसी वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा और फरवरी में भारत-एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेगा। दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और उसके शासन को लेकर नियम-कायदे तय हो रहे हैं, वैसे-वैसे ग्लोबल साउथ के देशों के सामने यह चुनौती खड़ी हो गई है कि वे अपनी एक साझा और स्पष्ट सोच विकसित करें।



