विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस एक जागरूकता दिवस है। जो हर साल 10 सितंबर को यानि आज मनाया जाएगा ताकि वर्ष, 2003 से दुनिया भर में विभिन्न गतिविधियों के साथ आत्महत्याओं को रोकने के लिए दुनिया भर में प्रतिबद्धता और कार्रवाई प्रदान की जा सके। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ की ओर से संचालित एक वैश्विक पहल है। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, कलंक को कम करना और ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित करना है जो जीवन बचाने में मददगार हो सकते हैं। वर्तमान में दिन पर दिन आत्महत्याओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। आत्महत्या एक जटिल और गहरा व्यक्तिगत मुद्दा है, जो अक्सर किसी एक कारण के बजाय कई कारकों के एक साथ होने का परिणाम होता है। यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है, चाहे उसकी उम्र, लिंग या पृष्ठभूमि कुछ भी हो और भावनात्मक पीड़ा, निराशा या बोझ जैसा महसूस करने के अनुभवों से जुड़ा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में प्रतिवर्ष करीब आठ लाख लोग आत्महत्या करते हैं। यानी हर 40 सेकंड में एक से ज्यादा लोग आत्महत्या करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से आधी से ज्यादा मौतें 50 साल की उम्र से पहले होती हैं और 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है। जो लोग पीछे छूट जाते हैं, उनके लिए यह नुकसान सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि एक गहरा ज़ख्म है जो परिवारों, दोस्ती और समुदायों को हमेशा के लिए बदल देता है। इस वर्ष का विषय कार्य के माध्यम से आशा का सृजन है, यह इस बात पर जोर देता है कि दया, करुणा और समझ के छोटे-छोटे प्रयास भी सार्थक बदलाव ला सकते हैं। यह व्यक्तियों, समुदायों और संगठनों से आह्वान करता है कि वे मिलकर ऐसे सहायक वातावरण का निर्माण करें जहां मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए और सहायता सुलभ हो। यह दिन ना केवल चुनौती को स्वीकार करने के बारे में है, बल्कि चुप्पी तोडक़र, आशा का विस्तार करके और रोकथाम के रास्ते बनाकर सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करने के बारे में भी है।

