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हर वर्ष अक्टूबर महीने के पहले सोमवार को यानि आज विश्व वास्तुकला दिवस मनाया जाएगा। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ आर्किटेक्ट्स ने वर्ष,1985 में इसकी शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य वास्तुकला के महत्व के प्रति समाज को जागरूक करना तथा बेहतर, सुरक्षित, समावेशी और टिकाऊ शहरों के निर्माण में वास्तुकारों की भूमिका को बताना है। इस वर्ष की थीम "आवास एक मानवाधिकार है। इसका निर्माण करें।" रखी गई है, जो सभी के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की आवश्यकता पर बल देती है। डिजिटल युग में वास्तुकला की और प्रासंगिकता बढ़ जाती है। वास्तुकला केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि तकनीक का एक अनूठा संगम बन चुकी है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग और वर्चुअल रियलिटी ने डिजाइन की दुनिया को बदल दिया है। आज डिजिटलीकरण की मदद से ऊर्जा-कुशल भवनों, आपदा-रोधी संरचनाओं और स्मार्ट अर्बन प्लानिंग को सटीक रूप देना संभव हो पाया है। डिजिटल युग में वास्तुकला की महत्ता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि यह वर्चुअल और भौतिक स्पेस के बीच की दूरी को पाट रही है। हालांकि, वास्तुकला और कलाप्रेमियों को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। युवा आर्किटेक्ट्स और डिजाइनरों के लिए राष्ट्रीय डिजाइन नवाचार फंड की स्थापना होनी चाहिए ताकि लीक से हटकर सस्टेनेबल मॉडल तैयार किए जा सकें। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक भारतीय वास्तुकला शैलियों को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष फेलोशिप और प्रतियोगिताएं आयोजित होनी चाहिए। इसके साथ ही सार्वजनिक और निजी भागीदारी के तहत शहरी सौंदर्यकरण में युवा प्रतिभाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जिससे देश के निर्माण क्षेत्र में रचनात्मकता और संवेदनशीलता का नया दौर शुरू हो सके। वास्तुकला केवल सुंदर भवन बनाने की कला नहीं है, बल्कि यह किसी देश की संस्कृति, इतिहास, जीवनशैली और सामाजिक विकास का प्रतिबिंब भी है। भारत में प्राचीन मंदिरों, किलों, बावडिय़ों, महलों और ऐतिहासिक नगरों से लेकर आधुनिक शहरी इमारतों तक वास्तुकला की समृद्ध परंपरा रही है। choice for global investors.

