Thursday, July 16, 2026 |
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मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे की समस्या के प्रति बढ़े जागरूकता

by Business Remedies
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जयपुर | बिजनेस रेमेडीज | मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे की समस्या के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने को लेकर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस मनाया जाएगा। हर साल 1 करोड़ हेक्टेयर जमीन रेगिस्तान में बदल रही है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो 2050 तक 50 फीसदी खेती वाली जमीन प्रभावित होगी। सूखे से फसल खराब होती है, पानी घटता है और किसान शहरों की तरफ पलायन करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जमीन और पानी की बचत सीधे खाने और रोजगार से जुड़ी है। इस वर्ष “चरागाहों को पहचानें, उनका सम्मान करें और उनका पुनर्स्थापन करें” थीम रहेगी। इस आयोजन की मेजबानी Kenya कर रहा है, जहां देश की 30 फीसदी जमीन पहले ही डिग्रेड हो चुकी है। वर्ष 1994 में United Nations ने मरुस्थलीकरण रोकथाम Convention पास किया। वर्ष 1995 में UNGA ने इसे दिवस के रूप में घोषित किया, क्योंकि इसी दिन 1994 में UNCCD पर हस्ताक्षर हुए थे। पहला दिवस वर्ष 1997 में मनाया गया।

महत्वत्ता

इस दिवस की महत्वत्ता इस बात में है कि भूमि केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि भोजन, पानी, जैव विविधता और मानव जीवन का आधार है। भूमि संरक्षण, सतत कृषि और जल प्रबंधन के माध्यम से मरुस्थलीकरण तथा सूखे की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। यह दिन सिर्फ रेगिस्तान की बात नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि अगर आज जमीन नहीं बचाई तो कल खाना और पानी दोनों महंगे हो जाएंगे। भूमि क्षरण से वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के आवास नष्ट होते हैं। सूखा और भूमि क्षरण कृषि उत्पादन घटाते हैं, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है। जल संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास के लिए भी यह जरूरी है। आज भी Rajasthan, Gujarat, Maharashtra और Karnataka के बड़े हिस्से मरुस्थलीकरण की समस्या से जूझ रहे हैं।



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