1971 में हुई थी इस औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना. | जयपुर का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र के हाल बेहाल | व्यापारिक एसोसिएशन ने कई बार लिखा सरकार व रीको को पत्र
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। जयपुर के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र में समस्याओं का अंबार है। अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे इस क्षेत्र में वाहन चलाना भी मुश्किल हो गया है। साथ ही अन्य समस्याएं भी यहां हैं। 1971 में इस औद्योगिक क्षेत्र का सरकार ने निर्माण किया था। तब सरकार ने कहा था कि क्षेत्र में उद्यमियों को सभी सुविधाएं मिलेंगी जो व्यापारियों को चाहिए, लेकिन दुख की बात है आज इस क्षेत्र को बने करीब 53 साल हो चुके हैं, लेकिन समस्याएं जस की तस हैं।
उद्यमियों ने कई बार सरकार को समस्याओं के बारे में पत्र के माध्यम से अवगत भी कराया है, लेकिन कोई सुधार नहीं होने से व्यापारी परेशान हैं। 1971 में जब इस औद्योगिक क्षेत्र का गठन किया गया था, तब सरकार ने व्यापारियों से वादा किया था कि हम इस औद्योगिक क्षेत्र में वे सारी सुविधाएं देंगे, जिनकी उद्यमियों को जरूरत है, लेकिन आज आधी सदी बीतने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए यह क्षेत्र तरस रहा है। सरकार की ओर से किए गए वादों के पूरा न होने से व्यापारी निराशा हैं।
वर्तमान में क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण की है। इस कारण क्षेत्र की सडक़ों पर निकलना भी मुश्किल है। घंटों जाम में फंसना व्यापारियों की नियति बन चुका है। इस बारे में सरकार को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से हालात जैसे हैं वैसे ही बने हुए हैं।
दिनभर लगता है जाम: क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों ने बताया, पूरे क्षेत्र में एनक्रोचमेंट की समस्या सबसे बड़ी है। अतिक्रमण के कारण क्षेत्र की सडक़ें दिनभर जाम रहती हैं। इस संबंध में सरकार को भी कई बार लिखा जा चुका है। रीको के एमडी को भी कई बार पत्र देकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। सरकार ने यातायात को सुचारू करने के लिए ट्रैफिक लाइटें भी लगा रखी हैं, लेकिन अनदेखी के चलते हाल बेहाल हैं। व्यापारियों ने बताया, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र से सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का रेवेन्यू मिलता है। बावजूद इसके क्षेत्र की समस्याओं में सुधार न होना समझ से परे है।
क्षेत्र में खुले मिनी सेटेलाइट हॉस्पिटल: उद्यमियों ने बताया, इस क्षेत्र में करीब एक लाख से ज्यादा मजदूर कार्यरत हैं। किसी भी दुर्घटना के समय व्यक्ति को उपचार नहीं मिल पाता। गंभीर दुर्घटना होने पर उन्हें कांवटिया अस्पताल या सवाई मानसिंह अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। कहने को तो क्षेत्र में एक ईएसआई डिस्पेंसरी संचालित है, लेकिन यह डिस्पेंसरी सुबह दो घंटे व शाम को दो घंटे ही खुलती है। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र में एक मिनी सेटेलाइट हॉस्पिटल खोला जाए, जिससे किसी आपात स्थिति में मजदूरों को 24 घंटे इलाज मिल सके। उद्यमियों ने बताया, वर्तमान में क्षेत्र में पांच हजार से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें 24 घंटे काम होता है। ऐसे में दुर्घटना होना आम बात है। सरकार को व्यापारियों की इस मांग पर ध्यान देना चाहिए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सही उपचार मिल सके। व्यापारियों ने ईएसआई की लिमिट भी 21 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग की है ताकि इस महंगाई के जमाने में यहां कार्यरत मजदूरों को सरकारी इलाज का लाभ मिल सके।
अनाधिकृत थडिय़ों-ढाबों को हटाने की मांग: एसोसिएशन ने सरकार व रीको को पत्र लिखकर बताया कि क्षेत्र में अनाधिकृत थडिय़ों, ढाबों, बंजारों व अन्य अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए, जिससे रास्ते खुले-खुले लगें। क्षेत्र में थडिय़ों का जाल सा बिछा हुआ है। इसी प्रकार सडक़ों पर काफी अनाधिकृत अतिक्रमण हो रखे हैं। इन अवैध व अनाधिृत थडिय़ों की वजह से जगह-जगह दिनभर जाम रहता है। इनको हटाकर रीको द्वारा साप्ताहिक मॉनिटरिंग कराई जाए, जिससे ये अतिक्रमण दोबारा न हों।
ट्रैफिक व्यवस्था सुधारी जाए: विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र काफी पुराना है। क्षेत्र में समय के साथ जो बदलाव व विकास होना चाहिए, वह नहीं हुआ। इस कारण वीकेआई क्षेत्र की यातायात व्यवस्था बहुत ही दयनीय है। क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बीते दिनों ट्रांसपोर्ट मालिकों के साथ बैठक भी की, लेकिन इस बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला। हालात जस के तस हैं। कई बार बिना वजह ट्रक क्षेत्र में कई-कई दिन तक खड़े रहते हैं। इस कारण जाम लगता रहता है। व्यापारियों ने सरकार से निवेदन किया है कि ऐसी गाडिय़ों व ट्रकों को चिंहित कर तत्काल हटाया जाए, जिससे जाम के हालात बन बनें।

– जगदीश सोमानी, अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, जयपुर
सरकार ने वीकेआई को 1971 में बनाया था। उस समय सभी व्यापारियों को यह बोला गया था कि यह एमएसएमई का सबसे बड़ा हब होगा, लेकिन लगातार अनदेखी से क्षेत्र के हाल-बेहाल हो रहे हैं। अतिक्रमण की वजह से दिनभर जाम के हालात बने रहते हैं। घंटों जाम में फंसना आम बात है। इसके अलावा इतने बड़े क्षेत्र में दुर्घटना के समय मजदूरों के लिए आपात इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। इस विषय में सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए और मिनी सेटेलाइट हॉस्पिटल क्षेत्र में विकसित करना चाहिए, जिससे मजदूरों को समय पर इलाज मिल सके। साथ ही क्षेत्र में जितने भी अतिक्रमण हैं, उन्हें भी अभियान चलाकर तत्काल हटाया जाना चाहिए, जिससे क्षेत्र की राह खुले। इस संबंध में रीको एमडी व सरकार को कई बार पत्र भी लिखा जा चुका है।
– जगदीश सोमानी, अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, जयपुर

ताराचंद चौधरी, पूर्व अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र में ट्रांसपोटेशन की सबसे ज्यादा हालत खराब है। दिनभर घंटों जाम लगा रहता है। शाम को घर जाने में भी दो-दो घंटे लग जाते हैं। क्षेत्र में जितने भी ट्रांसपोटर हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। क्षेत्र में थड़ी-ठेलों वालों का अतिक्रमण भी काफी ज्यादा है। क्षेत्र में रोडों को नो पार्किंग रोड घोषित किया हुआ है। क्षेत्र में 1सी, 1डी व 12 नंबर रोड को नो पार्किंग घोषित किया हुआ है, लेकिन इन्हीं रोडों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इस संबंध में सरकार व रीको को कई बार लिख कर दिया जा चुका है, लेकिन हालात जस के तस हैं। क्षेत्र की इस समस्या को सुधारने के लिए तत्काल प्रभाव से लगी हुई ट्रैफिक लाइट्स को जल्द से जल्द चालू किया जाना चाहिए। मस्जिद के पास रोड नंबर 12 का जो चौराहा है, सबसे ज्यादा हालत इस रोड की खराब है। इस रोड पर दिनभर जाम रहता है। इससे क्षेत्र के उद्यमी खासे परेशान हैं।
– ताराचंद चौधरी, पूर्व अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और अध्यक्ष, यूनाइटेड कौंसिल ऑफ राजस्थान इंडस्ट्रीज, जयपुर

– शेख नसीम, मैनेजिंग डायरेक्टर, शेरा एनर्जी लिमिटेड, वीकेआई, जयपुर
औद्योगिक क्षेत्र में वेयरहाउस को परमिशन देना गलत है। इससे क्षेत्र में गाडिय़ों का मूवमेंट काफी हो जाता है। क्षेत्र में जो रीको का इंफ्रास्ट्रक्चर बना हुआ है वह रोडों को सपोर्ट नहीं करता। इस कारण दिनभर जाम के हालात रहते हैं। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण करीब 52 साल पहले हुआ। पहले इसमें केवल इंडस्ट्री ही थीं, बाद में रीको ने वेयरहाउस के लाइसेंस भी दे दिए। इससे समस्या बढ़ गई। पहले इस क्षेत्र में उद्योगों के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया गया। यह इंफ्रास्ट्रक्चर वेयरहाउस व अन्य चीजों को सपोर्ट नहीं कर रहा है। इस कारण ट्रैफिक जाम, इंडस्ट्री को परेशानी और जो उद्योग वर्तमान में चल रहे हैं, उन्हें अपनी गाडिय़ों के मूवमेंट में परेशानी होती है। क्षेत्र में चोरियां भी बढ़ गई हैं। वर्तमान में क्षेत्र में बाहर के अनआइडेंटिफाइड लोग बहुत ज्यादा हैं। चोरियों पर कंट्रोल करना प्रशासन के लिए एक चैलेंज हो गया है।
– शेख नसीम, मैनेजिंग डायरेक्टर, शेरा एनर्जी लिमिटेड, वीकेआई, जयपुर

