New Delhi,
अमेरिका ने चीन के rare earth खनिजों पर बढ़ते नियंत्रण को एक बड़ी रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा है। ये खनिज electronic उत्पादों, रक्षा उपकरणों और electric vehicles के निर्माण में बेहद जरूरी माने जाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि इन खनिजों के उत्पादन और तकनीक को चीन के हाथों में जाने देने के लिए खुद अमेरिका भी जिम्मेदार रहा है। अमेरिकी समाचार पोर्टल Defense One की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने इन खनिजों के उत्पादन से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए खुद ही तकनीक चीन को सौंप दी थी। इस फैसले का असर अब लंबे समय बाद दिखाई दे रहा है।
अमेरिका के सहायक रक्षा सचिव (औद्योगिक आधार नीति) माइक कैडेनाज़ी ने कहा कि शीत युद्ध के बाद अमेरिका ने अपनी उन्नत वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी निवेश को चीन के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदूषण से बचना प्राथमिकता थी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो पीढ़ियों के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और व्यापारिक विशेषज्ञों को खो दिया।कैडेनाज़ी के अनुसार, आज अमेरिका rare earth खनिजों के लिए लगभग 95 प्रतिशत तक चीन पर निर्भर हो गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अमेरिका के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इसे बदलने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि चीन इस समय वैश्विक विनिर्माण में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है। इसके अलावा, चीन की कुल उत्पादन क्षमता अमेरिका की तुलना में कई गुना अधिक है।
वैश्विक स्तर पर चीन का मजबूत नियंत्रण
रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया के करीब 70 प्रतिशत rare earth खनिजों का उत्पादन करता है और लगभग 90 प्रतिशत का प्रसंस्करण करता है। यही कारण है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन का दबदबा बना हुआ है। हालांकि, अमेरिका ने हाल के वर्षों में इन खनिजों के शोधन और प्रसंस्करण में निवेश बढ़ाया है। अक्टूबर में अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण के लिए एक रूपरेखा की घोषणा भी की थी।
अन्य देश भी बढ़ा रहे उत्पादन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अन्य देश भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। कनाडा स्थित कंपनी अलमोंटी इंडस्ट्रीज दक्षिण कोरिया में एक नए टंगस्टन प्रसंस्करण संयंत्र को शुरू करने जा रही है। कंपनी का दावा है कि इससे चीन के बाहर वैश्विक मांग का करीब 40 प्रतिशत पूरा किया जा सकेगा और चीन के प्रभुत्व को चुनौती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में और तेज होगी। अमेरिका सहित कई देश अब चीन पर निर्भरता कम करने के लिए रणनीतिक कदम उठा रहे हैं, ताकि आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाया जा सके।

