डिजिटल भुगतान का मजबूत आधार
भारत में Unified Payments Interface यानी UPI अब केवल भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि Digital Public Infrastructure का प्रमुख स्तंभ बन चुका है। इसने नकदी रखने की जरूरत घटाई, छोटे व्यापारियों तक तुरंत भुगतान पहुंचाया और Financial Inclusion को मजबूती दी है।
हर क्षेत्र में बढ़ा इस्तेमाल
छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े Business, E-commerce, Taxi, बिजली बिल, Online Services और Person-to-Person Transfer तक UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। QR Code आधारित भुगतान ने ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए Transaction को आसान, तेज और सुविधाजनक बनाया है।
21 बैंकों से हुई शुरुआत
UPI को National Payments Corporation of India यानी NPCI ने विकसित किया था। इसका Pilot Launch 11 अप्रैल 2016 को 21 बैंकों के साथ हुआ। इसके बाद यह कुछ ही वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े Real-time Digital Payment Networks में शामिल हो गया।
अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार
UPI ने Digital Economy, E-commerce और Fintech कंपनियों के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। छोटे कारोबारियों के लिए Digital Payment स्वीकार करना आसान हुआ है। वहीं, Digital Transactions के बढ़ते दायरे ने अधिक लोगों और व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद की है।
रिकॉर्ड स्तर पर Transaction
वित्त वर्ष 2025-26 में UPI पर 24,161.69 करोड़ Transaction हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 314 लाख करोड़ रुपये रहा। जुलाई 2026 में UPI ने 23.66 अरब Transaction और करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये के मासिक मूल्य का नया रिकॉर्ड बनाया।
Global विस्तार की तैयारी
कई देशों में UPI आधारित भुगतान और Cross-border Services शुरू हो चुकी हैं। Credit Line, AutoPay और अन्य Digital Financial Services के बढ़ते उपयोग के साथ आने वाले वर्षों में UPI का Global दायरा और Transaction Volume बढ़ने की संभावना है।

