नई दिल्ली,
भारतीय मुद्रा रुपया ने बुधवार को लगातार चौथे दिन मजबूती दिखाई और डॉलर के मुकाबले बढ़त दर्ज की। वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का फैसला रहा, जिससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव से बाजारों को राहत मिली। रुपया लगभग 0.4 प्रतिशत बढ़कर 92.61 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 93 पर बंद हुआ था। इस बढ़त का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार और निवेशकों के भरोसे में वृद्धि से जुड़ा माना जा रहा है। युद्धविराम की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई। ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 16 प्रतिशत गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, वहीं अमेरिकी कच्चा तेल करीब 20 प्रतिशत गिरकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। तेल कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है।
अमेरिका-ईरान समझौते से बाजार में राहत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की, जिससे भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है। इस समझौते के तहत दो सप्ताह तक किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई पर रोक रहेगी और होरमुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने का निर्णय लिया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है और किसी भी समय तनाव फिर बढ़ सकता है, क्योंकि इजराइल की ओर से हमले जारी रहने की आशंका बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। यह निर्णय महंगाई और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
निवेशकों की रणनीति पर असर
विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में आई मजबूती आयातकों के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर रही है। हालांकि विदेशी निवेशक अभी भी शेयर बाजार में बिकवाली करते नजर आ रहे हैं, जिससे आगे की दिशा अनिश्चित बनी हुई है। इस बीच मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। सोना वायदा (जून 2026) लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी वायदा (मई) करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा। stock market update के लिहाज से वैश्विक संकेत फिलहाल सकारात्मक बने हुए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में युद्धविराम की स्थिति और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।

