Saturday, July 11, 2026 |
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सीमा शुल्क कम करने से उद्योगों को आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद

by Business Remedies
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punit jain

भारत का पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया है। बजट में वित्त मंत्री ने तमाम वस्तुओं पर सीमा शुल्क में कटौती, एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी योजना और ई-कॉमर्स केंद्र की स्थापना जैसी बजट घोषणाओं से घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा दिया है। स्पैन्डेक्स, चमड़ा और समुद्री सामान जैसे सामान पर सीमा शुल्क कम करने से उद्योग को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। परिधान उद्योग आईजीसीआर के तहत ट्रिम्स और एम्बेलिशमेंट की सूची का विस्तार करने से तैयार कपड़ों की निर्यात खेप को बढ़ाने में मदद मिलेगी। विनिर्माण क्षेत्र में एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी योजना के तहत सीमा में वृद्धि, सभी औपचारिक क्षेत्रों में नए प्रवेशकों को 15,000 रुपए तक एक महीने का वेतन प्रदान करना, नए विनिर्माण कर्मचारियों के लिए चार साल तक ईपीएफओ अंशदान और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उन्नत करना परिधान उद्योग को आगे बढ़ाने और भविष्य के लिए तैयार करने में मदद करेगा। वहीं बजट में निर्यात शुल्कों को युक्तिसंगत बनाने और वेट ब्लू क्रोम टैंड लेदर, वेट व्हाइट लेदर, क्रस्ट लेदर और तैयार चमड़े सहित अधिक आदानों को शुल्क मुक्त योजना के तहत शामिल करने से रोजगार बढ़ाने और निर्यात वृद्धि में मदद मिलेगी। निर्यात शुल्क के मोर्चे पर वेट ब्लू और क्रस्ट लेदर पर निर्यात शुल्क 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे देश से मूल्यवर्धित प्रसंस्कृत चमड़े के निर्यात में सुविधा होगी, क्योंकि वैश्विक बाजार में इनकी भारी मांग है। सरकार क्रस्ट लेदर के लिए इस निर्यात शुल्क को हटा देगी, ताकि अगले 2-3 वर्षों में मूल्यवर्धित चमड़े के निर्यात को एक अरब डॉलर तक बढ़ाने के उद्देश्य को प्राप्त किया जा सके। जहां एक ओर बजट में बहुत कम क्षेत्रों को छोडक़र मौजूदा आयात शुल्क दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। सौर सेल और पैनल के निर्माण के लिए पूंजीगत वस्तुओं के साथ-साथ 25 महत्वपूर्ण खनिजों पर आयात शुल्क को समाप्त करने और उसमें कटौती करने से न केवल अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को बल्कि रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स,अंतरिक्ष जैसे कई उच्च प्रौद्योगिकी रणनीतिक क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा।



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