Thursday, July 16, 2026 |
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पश्चिम एशिया संकट के बीच आरबीआई ‘wait and watch’ स्थिति में: गवर्नर संजय मल्होत्रा

by Business Remedies
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RBI governor Sanjay Malhotra speaking on economy and West Asia crisis

New Delhi,

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के प्रभावों पर केंद्रीय बैंक लगातार नजर बनाए हुए है और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर अभी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आपूर्ति में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई देश के व्यापक मूल्य स्तर में स्थायी रूप से शामिल हो सकती है।

अमेरिका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय में दिए गए अपने भाषण में मल्होत्रा ने कहा कि यह संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सीधा खतरा है, क्योंकि इस क्षेत्र का भारत के व्यापार में बड़ा योगदान है। उनके अनुसार, भारत के कुल निर्यात का लगभग छठा हिस्सा, आयात का पांचवां हिस्सा, कच्चे तेल के आयात का आधा, उर्वरक आयात का दो-पांचवां और देश में आने वाली प्रेषण राशि का भी लगभग दो-पांचवां हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दूसरी बार पड़ने वाले प्रभाव सबसे बड़ी चिंता का विषय हैं। यदि आपूर्ति में बाधा लंबे समय तक जारी रहती है, तो यह सामान्य मूल्य स्तर में स्थायी असर डाल सकती है।

गवर्नर ने संकेत दिया कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव को लेकर जल्दबाजी में नहीं है और ‘wait and watch’ की नीति अपना रहा है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) अब भी आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेगी और जोखिमों का लगातार आकलन करती रहेगी। जून 2025 से समिति ने तटस्थ रुख बनाए रखा है, इससे पहले फरवरी 2025 से कुल 125 आधार अंकों की कटौती की गई थी। मल्होत्रा ने विदेशी मुद्रा बाजार में RBI के हस्तक्षेप का बचाव करते हुए कहा कि भारतीय मुद्रा को किसी अवास्तविक स्तर पर स्थिर रखने की कोई प्रतिबद्धता नहीं दी गई है। मार्च में संघर्ष शुरू होने के बाद भारतीय मुद्रा में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई थी। उन्होंने बताया कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 710 अरब डॉलर के स्तर पर हैं, जो 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त हैं।

गवर्नर ने RBI की विकास संबंधी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस और डिजिटल मुद्रा पायलट में हो रही प्रगति का उल्लेख किया। डिजिटल ढांचे के संदर्भ में उन्होंने बताया कि मार्च महीने में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से 22 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए। अब RBI छोटे किसानों और व्यवसायियों को त्वरित ऋण सुविधा देने के लिए यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) विकसित कर रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सरकार का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में वर्ष 2020-21 के 9.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 4.4 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024-25 में भारत का कुल सरकारी ऋण सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में 81.1 प्रतिशत रहा, जो एक संतुलित स्थिति मानी जा सकती है। उन्होंने बताया कि दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में से जर्मनी और रूस को छोड़कर अधिकांश देशों का ऋण अनुपात भारत से अधिक है।



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