New Delhi,
दक्षिण कोरिया की प्रमुख जहाज निर्माण कंपनी एचडी हुंडई ने भारत की सरकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी करते हुए देश में एक संयुक्त जहाज निर्माण यार्ड स्थापित करने की घोषणा की है। यह कदम भारत के औद्योगिक विकास और समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी ने जानकारी दी कि उसने नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क तमिलनाडु और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता New Delhi में किया गया, जिसके तहत एक संयुक्त उद्यम के रूप में जहाज निर्माण कंपनी स्थापित की जाएगी।
संयुक्त परियोजना में एचडी हुंडई की होगी प्रमुख भूमिका
इस साझेदारी के तहत एचडी हुंडई संयुक्त कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखेगी और पूरे संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। कंपनी का उद्देश्य भारत में एक आधुनिक और डिजिटल तकनीक आधारित जहाज निर्माण यार्ड विकसित करना है, जिससे उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता में वृद्धि हो सके। नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क तमिलनाडु एक विशेष उद्देश्य कंपनी है, जिसे भारत के बंदरगाह प्राधिकरणों द्वारा स्थापित किया गया है, जबकि सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन देश की बंदरगाह अवसंरचना परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग प्रदान करती है। यह समझौता दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आयोजित द्विपक्षीय शिखर बैठक के दौरान किया गया। इस पहल से दोनों देशों के बीच औद्योगिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय रोजगार और कौशल विकास पर जोर
एचडी हुंडई ने यह भी बताया कि वह भारत में जहाज निर्माण प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करेगी, जिससे स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिल सके। इसके साथ ही दक्षिण कोरिया के उपकरण आपूर्तिकर्ताओं को भारतीय बाजार में प्रवेश के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे। कंपनी के अनुसार, भारत सरकार प्रारंभिक चरण में अपने जहाज निर्माण के ऑर्डर दक्षिण कोरिया स्थित यार्ड को दे सकती है और भारतीय श्रमिकों को व्यावहारिक अनुभव के लिए वहां भेजा जाएगा। इसी के साथ, हुंडई मोटर ने भारत की टीवीएस मोटर कंपनी के साथ मिलकर भारतीय बाजार के लिए इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन विकसित करने का समझौता किया है। इस परियोजना के तहत वाहन का डिजाइन और विकास कार्य हुंडई मोटर द्वारा किया जाएगा, जबकि टीवीएस मोटर अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और स्थानीय बाजार की समझ के आधार पर सहयोग करेगी। इस पहल से भारत में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा मिलने की संभावना है और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।

