मुंबई। MSCI Index Rebalancing सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अहम परीक्षण साबित होने जा रहा है। इस दौरान नए Closing Auction Session (CAS) सिस्टम में Passive Funds की ओर से बड़े पैमाने पर होने वाली ट्रेडिंग पर बाजार विशेषज्ञों की नजर रहेगी।
MSCI Index में बदलाव
MSCI Rebalancing ट्रेडिंग सत्र के आखिरी चरण में होगा। इस प्रक्रिया के तहत चार Stocks को MSCI Standard Index में शामिल किया जाएगा, जिनमें Adani Energy Solutions भी शामिल है। Index में शामिल होने वाले Stocks में Passive Funds की ओर से खरीदारी देखने को मिल सकती है, जबकि बाहर होने वाले Stocks में बिकवाली का दबाव आ सकता है।
400 Million Dollar तक का संभावित Flow
Market Estimates के अनुसार, Adani Energy Solutions समेत चार Stocks में करीब 280 Million Dollar से 400 Million Dollar तक का Inflow आने की संभावना है। वहीं, Index से बाहर होने वाले तीन Stocks में करीब 110 Million Dollar से 150 Million Dollar तक का Outflow देखा जा सकता है।
नए Closing Auction System पर नजर
Market Experts इस Rebalancing के जरिए नए CAS Mechanism की कार्यक्षमता को परख रहे हैं। यह नई व्यवस्था अगस्त की शुरुआत में लागू की गई थी, जिसके तहत 3:30 PM पर तय होने वाला एक Equilibrium Price ही आधिकारिक Closing Price माना जाएगा।
F&O Stocks में बढ़ सकती है Volatility
क्योंकि Futures and Options Segment की Trading 3:15 PM पर समाप्त हो जाती है और Order Placement के लिए केवल 3:20 PM से 3:30 PM तक का समय मिलता है, इसलिए Passive Funds के पास Rebalancing Trades पूरे करने के लिए सीमित समय रहेगा।
Liquidity को लेकर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि F&O Segment से बाहर के Stocks में Rebalancing प्रक्रिया पहले जैसी रह सकती है, लेकिन F&O Stocks में Volatility बढ़ सकती है। बड़े Institutional Orders को पूरा करने में Liquidity की कमी चुनौती बन सकती है।
Tracking Error का जोखिम
यदि Closing Auction Session में पर्याप्त Liquidity उपलब्ध नहीं होती है, तो Passive Funds कुछ Trades को अगले Trading Session तक टाल सकते हैं। इससे Tracking Error बढ़ने की संभावना रहती है। MSCI Rebalancing यह तय करेगा कि नया Closing Mechanism बड़े Benchmark Driven Flows को बिना Price Distortion के संभालने में कितना प्रभावी है।

