समिट से पहले औद्यागिक संगठनों ने उठाए कुछ परेशानियों भरे मुद्दे, जिनमें सुधार आवश्यक
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। राजस्थान में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए राइजिंग राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट का आयोजन 9 से 11 दिसंबर तक जयपुर में होगा। इस समिट से पहले औद्योगिक संगठनों ने कुछ परेशानियों भरे मुद्दे उठाए हैं, जिन पर सरकार को गौर करना एवं सुधार आवश्यक है।
औद्योगिक संगठनों का मानना है कि, सरकार द्वारा किसी भी तरह की नई स्कीम निकालने या इनवेस्टमेंट समिट करने से पहले पूर्व में जो इंडस्ट्रियल एरिया में मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण उद्यमी लगातार परेशान चल रहे हैं। उसमें सुधार करें तभी किसी भी तरीके की इनवेस्टमेंट समिट का फायदा सरकार एवं उद्योगपतियों द्वारा लगाई जाने वाली इंडस्ट्री को मिल पाएगा।
प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों की प्रमुख समस्याएं
1. बदहाल सडक़ें व इंफ्रा: रीको द्वारा स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों में सडक़ों की हालत जर्जर हो चुकी है। इस बार तेज बारिश ने इसका और भी बुरा हाल कर दिया है। कई औद्योगिक क्षेत्रों में तो एपरोच रोड ही नहीं हैं। जैसे जयपुर के प्रहलादपुरा व रामचन्द्रपुरा वालों ने तो पिछले इनवेस्टमेंट समिट में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए थे कि हमारे उद्योग में आना है तो हेलीकॉप्टर से आना होगा। सडक़ मार्ग है ही नहीं। बड़ी हास्यास्पद स्थिति है, तब से अभी तक हजारों आश्वासन के बाद भी सडक़ें नहीं बन सकी और हाल ही में सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन द्वारा इसी तरह के होर्डिंग्स फिर से लगाए गए हैं। देखना यह होगा कि क्या सरकार इसमें सुधार कर पाएगी या उद्योगपतियों को इनवेस्टमेंट करने के बाद ऐसे ही जूझना होगा।
2. पावर ट्रिपिंग/फेल्योर: रीको औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन 8-10 बार बिजली का जाना आम बात है, जो कन्टीन्यूअस प्रोसेस वाले उद्योग हैं उन्होंने तो इस समस्या से परेशान होकर अपना केप्टीव पॉवर जेनरेशन सिस्टम लगा लिया है, पर छोटे व मझौले उद्योग अभी भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। पुरानी बिजली की लाइनें स्पार्क करते हुए जर्जर ट्रांसफार्मर, लो मेंटेनेंस जिसकी वजह से हल्की बारिश और तेज हवा चलते ही पॉवर सप्लाई डाऊन हो जाती है। औद्योगिक क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर अभियान चला कर इन स्थितियों में परिवर्तन करना होगा।
3. मजदूरों का पड़ोसी राज्यों में पलायन: मजदूरों का पड़ोसी राज्यों में पलायन का प्रमुख कारण उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट सुविधाएं, मेट्रो कल्चर उसको आकर्षित करता है। हमारी यह ऐसेट किसी और राज्य के उद्योग की ताकत बन जाती है। अत: राज्य सरकार को मजदूरों के लिए औद्योगिक क्षेत्रों के पास आवासीय कॉलोनी विकसित करनी चाहिए तथा बेहतर इंफ्रा के साथ बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
4. पर्यावरण व वन विभाग से समस्या : कई बार अच्छे बड़े और नामी उद्योग भी इन विभागों की चपेट में आकर अपना उद्योग बंद कर चुके हैं। अभी पिछले वर्ष का ताजा उदाहरण कोटा की घडिय़ाल सेंचुरी का एरिया नोटिफाई नहीं करना रहा, जिससे पूरे कोटा के उद्योगों का विकास, नया निवेश व एक्स्पेंसन ठप हो गया। इसमें प्रदेश के विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार के उच्च अधिकारियों को कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए, जिससे बड़े प्रोजेक्ट को स्थापित होने में कोई अड़चन ना आए और ऐसे उद्योगों के लिए एक स्पेशल डेडिकेटेड नोडल ऑफिसर प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र को देना चाहिए, जो उद्योग को पर्यावरण, वन विभाग व ग्राउंड वाटर की परमिशन दिलवाने में मदद करे। उद्योगों को विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ें। क्योंकि उद्योग लगेगा तो एम्प्लायमेंट बढ़ेगा व रेवन्यू जनरेट होगा और प्रदेश के विकास रथ का पहिया चलेगा।
5. शहरी क्षेत्रों में आ चुके औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं का हो समाधान: एक समय था जब शहरी सीमा छोटी थी शैन: शैन: अनियंत्रित विकास होने की वजह से पुराने औद्योगिक क्षेत्र शहरी सीमा में आ गए और निगम व लोकल बॉडी इनसे बड़े-बड़े टैक्स की डिमांड करने लगे। इन्हें दुधारू गाय ना समझ उद्योग तक ही सीमित रहे तो ठीक होगा। राज्य में ऐसे लगभग 38 औद्योगिक क्षेत्र हैं, जो अब शहरी सीमा में हैं। काफी पुराने भूखंड विभाजित भी हो चुके हैं और समय के साथ इनमें उद्योगों के अलावा अन्य उपयोग प्रारम्भ हो गए हैं। अत: सरकार इन एरिया को फ्री होल्ड कर मल्टीपल यूज के एरिया नोटिफाई कर लोकल बॉडी में परिवर्तित कर दे तो ये एरिया विकास की नई इबारत लिख सकेंगे।
इनके अलावा ये सुझाव भी दिए गए
– फ्यूल सरचार्ज लेना पूर्ण रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।
– बिजली की एक फिक्स रेट 6/- प्रति यूनिट करनी चाहिए।
– फायर सेस, वाटर सेस, अरबन सेस ये सभी उद्योगों पर से समाप्त करने चाहिए सिर्फ फायर एनओसी अनिवार्य हो, जिससे कल कारखानों में कार्यरत मैन पॉवर सुरक्षित वातावरण में कार्य कर सके।
– नए प्रोजेक्ट को रीको औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि नि:शुल्क देने की व्यवस्था होनी चाहिए- जैसा पड़ोसी राज्य दे रहे हैं, ये भी इन्वेस्टमेंट का बहुत बड़ा आकर्षण है।
– एमएसएमई को अपनी फाइनेंस की जरूरतों के लिए एमएसएमई क्रेडिट कार्ड दिया जाना चाहिए। बस ये सब हो जाए तो राजस्थान का विकास रफ्तार पकड़ लेगा। इसके लिए सरकार की मजबूत इच्छा शक्ति व तुरंत निर्णय लेने वाले अधिकारियों की आवश्यकता होगी।
9 से 11 दिसंबर को राइजिंग राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट हो रही है। इसमें सरकार नए उद्योगों को बुला रही है। इसी प्रकार के कई आयोजन प्रदेश में हो चुके हैं। इनमें उद्योगपति आते हैं, एमओयू साइन करते हैं, लेकिन ये धरातल पर नहीं उतर पाते। जब तक समस्याओं को आईडेंटीफाई नहीं किया जाएगा और उनका समाधान नहीं होगा, तब तक कोई बड़ी इंडस्ट्री प्रदेश में नहीं आएगी। प्रदेश में बिजली की दरें काफी ज्यादा हैं। इस कारण इंडस्ट्री दूसरे राज्यों में जा रही हैं। प्रदेश में खनिजों के भंडार हैं, लेकिन सारा दूसरे राज्यों में जा रहा है। जब तक राजस्थान में बिजली की दरें नहीं घटाई जाएंगी, तब तक यहां नई इंडस्ट्री नहीं लगेंगी। सरकार को बिजली की दरें कम करनी चाहिए, जिससे प्रदेश में इंडस्ट्री को बढ़ावा मिले। राजस्थान को विकसित करने के लिए सरकार को इन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
एन. के. जैन
अध्यक्ष, दी एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

