नई दिल्ली | एजेंसी | निजी क्षेत्र की गतिविधियों में वित्त वर्ष 2026 में बड़ा उछाल देखने को मिला है और इस दौरान करीब 56 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान हुआ है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025 में 37 लाख करोड़ रुपये पर था। यह जानकारी SBI Research की एक रिपोर्ट में दी गई। यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब निजी क्षेत्र के निवेश की गति को लेकर चर्चा जोरों पर है और इससे संकेत मिलता है कि देश में निजी निवेश में तेजी आ रही है। SBI Research ने अपनी ताजा EcoWrap Report में बताया है कि निजी निवेश घोषणाओं में इस वर्ष तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल निवेश गतिविधि में व्यापक उछाल आया है।
कुल निवेश घोषणाएं 80 लाख करोड़ रुपये के पार
वित्त वर्ष 2019 में 17 लाख करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में सभी क्षेत्रों में कुल निवेश घोषणाएं बढ़कर 80 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान नए निवेश प्रस्तावों में विनिर्माण क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान रहा, जो कुल का 28.9 प्रतिशत था।
विनिर्माण और विद्युत क्षेत्र का बड़ा योगदान
विद्युत क्षेत्र का स्थान इसके ठीक बाद रहा, जिसका हिस्सा 28.7 प्रतिशत था, जबकि अवसंरचना निर्माण परियोजनाओं का कुल निवेश प्रस्तावों में 23.1 प्रतिशत का योगदान रहा।
GDP आंकड़ों से निवेश गतिविधियों में तेजी की पुष्टि
SBI Research के अनुसार, हालिया GDP आंकड़ों से इस बात की पुष्टि होती है कि निवेश गतिविधियों में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2026 निवेश रुझानों का आकलन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, क्योंकि आधिकारिक आर्थिक आंकड़े पूंजी निर्माण में मजबूती का संकेत देते हैं, विशेष रूप से वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के दौरान।
GFCF में 10.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि
सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF), जो अर्थव्यवस्था में निवेश को मापने का एक प्रमुख संकेतक है, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 10.8 प्रतिशत बढ़ा। GFCF में यह मजबूत वृद्धि दर्शाती है कि व्यवसायों ने मशीनरी, उपकरण, बुनियादी ढांचे और अन्य दीर्घकालिक निवेशों जैसी संपत्तियों पर खर्च बढ़ाया है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि निवेश घोषणाओं में तीव्र वृद्धि, मजबूत पूंजी निर्माण आंकड़ों के साथ मिलकर, निवेश चक्र में सुधार का संकेत देती है और आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास को समर्थन प्रदान कर सकती है।

